सागर के किसान पुष्पेन्द्र कुर्मी ने मक्का साइलेज यूनिट से पशुओं के लिए सालभर पौष्टिक चारे की व्यवस्था की। जानें कैसे इस तकनीक से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।
मध्यप्रदेश के सागर जिले में किसान पुष्पेन्द्र कुर्मी ने आधुनिक कृषि तकनीक और उन्नत पशुपालन को अपनाकर दूसरे किसानों के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। रहली विकासखंड के पटना बुजुर्ग गांव के रहने वाले पुष्पेन्द्र ने अपने खेत में मक्का साइलेज यूनिट स्थापित की है। इसके माध्यम से मक्का से पौष्टिक साइलेज तैयार किया जा रहा है, जिससे पशुओं के लिए पूरे साल चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल रही है।
यह पहल मध्यप्रदेश के सेवा संकल्प अभियान 2026 की ‘कहानी सेवा की’ श्रृंखला में सामने आई है। इसका उद्देश्य खेती और पशुपालन में बेहतर परिणाम देने वाली तकनीकों को प्रोत्साहित करना है।
मक्का साइलेज यूनिट से सालभर चारे की व्यवस्था
पारंपरिक पशुपालन में हरे चारे की उपलब्धता मौसम और खेती के चक्र पर निर्भर करती है। ऐसे में मक्का से साइलेज तैयार करने की तकनीक पशुपालकों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है। साइलेज एक विशेष प्रक्रिया से संरक्षित किया गया चारा है, जिसे जरूरत के अनुसार पशुओं को खिलाया जा सकता है।
पुष्पेन्द्र कुर्मी ने अपने खेत पर आधुनिक मक्का साइलेज यूनिट लगाकर इस तकनीक को अपनाया है। इससे मक्का की फसल का बेहतर उपयोग करने और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की व्यवस्था करने में सहायता मिल रही है।
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ट्रैक्टर से संचालित होती है साइलेज यूनिट
पुष्पेन्द्र कुर्मी की साइलेज यूनिट ट्रैक्टर से संचालित होती है। इस व्यवस्था से चारा तैयार करने और उसके परिवहन से जुड़ी लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
साइलेज के नियमित और संतुलित उपयोग से पशुओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। इस तकनीक से चारे की बर्बादी कम करने और पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने की भी संभावना रहती है।
दुग्ध उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का दावा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मक्का साइलेज के इस्तेमाल से दुग्ध उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि, पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और चारे की बर्बादी में कमी जैसे लाभ बताए गए हैं। हालांकि, वास्तविक परिणाम पशुओं की नस्ल, आहार की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और देखभाल पर निर्भर करते हैं।
पौष्टिक चारे की नियमित उपलब्धता से पशुपालन को अधिक व्यवस्थित बनाने और उत्पादन क्षमता में सुधार करने में मदद मिल सकती है। इस कारण साइलेज तकनीक उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो खेती के साथ दुग्ध उत्पादन को भी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनाना चाहते हैं।
दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बने पुष्पेन्द्र कुर्मी
पुष्पेन्द्र कुर्मी का प्रयास दिखाता है कि परंपरागत खेती के साथ आधुनिक पशुपालन तकनीकों को अपनाकर आय बढ़ाने के नए अवसर तलाशे जा सकते हैं। मक्का जैसी फसल से साइलेज तैयार करने पर फसल का उपयोग पशुओं के पोषण के लिए भी किया जा सकता है।
रहली के कृषि विभाग ने किसानों से उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने की अपील की है। विभाग का मानना है कि बेहतर चारा प्रबंधन और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के जरिए किसान अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
मक्का साइलेज यूनिट जैसी पहल खेती और पशुपालन को एक-दूसरे से जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का अवसर देती है। इससे किसानों को चारे की उपलब्धता बनाए रखने और पशुपालन को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

