आज का दिन भारत और यूरोपीय संघ (EU) के संबंधों के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने वाला दिन बन गया है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भारतीय नेतृत्व ने संयुक्त रूप से यह घोषणा की कि भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India–EU Free Trade Agreement) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक समझौते को भारत–ईयू संबंधों में एक मील का पत्थर बताया जा रहा है। लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद इस समझौते का निष्कर्ष निकलना इस बात का संकेत है कि भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे को भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देखते हैं। दोनों पक्षों ने इसे आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और भविष्य की संयुक्त दृष्टि का परिणाम बताया है।
इस मुक्त व्यापार समझौते का सबसे बड़ा लाभ आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलने के रूप में सामने आएगा। समझौते के तहत व्यापारिक बाधाओं को कम किया जाएगा, टैरिफ और गैर-टैरिफ अड़चनों में कमी आएगी, जिससे दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार तेजी से बढ़ेगा। इससे भारत और यूरोपीय संघ के बाजार एक-दूसरे के लिए और अधिक सुलभ बनेंगे।
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है। बढ़ते व्यापार और निवेश से भारत और यूरोप, दोनों ही क्षेत्रों में नई नौकरियों का सृजन होगा। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, स्टार्टअप्स, ग्रीन एनर्जी, फार्मा और सर्विस सेक्टर में युवाओं के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही यह समझौता व्यवसायों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) से लेकर बड़े उद्योग समूहों तक को यूरोपीय और भारतीय बाजारों में विस्तार का मौका मिलेगा। निवेश को बढ़ावा मिलने से तकनीक हस्तांतरण, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता में भी वृद्धि होगी।
भारत–ईयू एफटीए का एक अहम उद्देश्य साझा समृद्धि (Shared Prosperity) को बढ़ावा देना है। दोनों पक्षों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास को भी प्रोत्साहित करेगा। हरित प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग से वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा यह समझौता मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) के निर्माण में भी सहायक होगा। मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के दौर में भारत और यूरोपीय संघ का यह कदम आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता न केवल दोनों पक्षों के आर्थिक भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में स्थिरता और सहयोग का एक नया मॉडल भी प्रस्तुत करेगा। यह दिन वास्तव में ऐसा है, जिसे भारत और यूरोप आने वाली पीढ़ियों तक याद रखेंगे।


