हरियाणा सरकार ने राज्य की प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा परीक्षा HCS (हरियाणा सिविल सेवा) के पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा को अधिक पारदर्शी, विश्लेषणात्मक और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप बनाना है। संशोधित पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न से हजारों अभ्यर्थियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, जो HCS परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अब प्रारंभिक परीक्षा कुल 400 अंकों की होगी, जिसमें दो वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रश्नपत्र शामिल होंगे। दोनों प्रश्नपत्रों का उद्देश्य अभ्यर्थियों की सामान्य समझ, विश्लेषण क्षमता, समसामयिक घटनाओं और प्रशासनिक दृष्टिकोण का आकलन करना होगा। प्रारंभिक परीक्षा को केवल स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में रखा जाएगा, जिसके अंक अंतिम मेरिट में शामिल नहीं किए जाएंगे, लेकिन मुख्य परीक्षा के लिए पात्रता इसी के आधार पर तय होगी।
वहीं, मुख्य परीक्षा कुल 600 अंकों की होगी, जिसमें सामान्य अध्ययन के चार पेपर शामिल किए गए हैं। मुख्य परीक्षा में कुल छह वर्णनात्मक (Descriptive) प्रश्नपत्र होंगे। प्रत्येक प्रश्नपत्र की अवधि तीन घंटे की होगी और प्रत्येक पेपर 100 अंकों का होगा। इस नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों की विषयगत समझ, लेखन क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और प्रशासनिक समस्याओं पर दृष्टिकोण का गहन मूल्यांकन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों की संख्या बढ़ने से रटंत प्रणाली पर रोक लगेगी और अभ्यर्थियों को विषयों की गहराई से तैयारी करनी होगी। सामान्य अध्ययन के चार पेपरों में भारतीय इतिहास, संविधान, शासन व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, हरियाणा विशेष ज्ञान और समसामयिक विषयों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इस संशोधन को लागू करने की जिम्मेदारी Haryana Public Service Commission को सौंपी गई है। आयोग द्वारा जल्द ही विस्तृत पाठ्यक्रम, परीक्षा योजना और दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है, ताकि अभ्यर्थी नई प्रणाली के अनुसार अपनी तैयारी को सुव्यवस्थित कर सकें।
राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव HCS परीक्षा को अधिक निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धात्मक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाएगा। नई परीक्षा प्रणाली से ऐसे अधिकारी चयनित होंगे, जो नीतिगत समझ, निर्णय क्षमता और प्रशासनिक दक्षता में मजबूत हों।
अभ्यर्थियों में इस बदलाव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ उम्मीदवारों का मानना है कि वर्णनात्मक परीक्षा से वास्तविक प्रतिभा सामने आएगी, वहीं कुछ ने पाठ्यक्रम के विस्तार को चुनौतीपूर्ण बताया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सही रणनीति और नियमित अध्ययन से इस नई व्यवस्था में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
कुल मिलाकर, HCS परीक्षा के पाठ्यक्रम और पैटर्न में किया गया यह संशोधन हरियाणा की प्रशासनिक सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल चयन प्रक्रिया की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि राज्य को कुशल, सक्षम और दूरदर्शी अधिकारी भी मिल सकेंगे।


