भारत की सनातन संस्कृति, अटूट आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक सोमनाथ मंदिर एक बार फिर इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ाव का साक्षी बन रहा है। आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विधिवत शुभारंभ हो गया है। यह पर्व उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है, जब लगभग एक हजार वर्ष पूर्व जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था।
साल 1026 का वह आक्रमण केवल एक मंदिर पर हमला नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और आत्मसम्मान को तोड़ने का प्रयास था। इसके बाद भी इतिहास के विभिन्न कालखंडों में सोमनाथ पर कई हमले हुए, मंदिर को बार-बार ध्वस्त किया गया, लेकिन हर बार यह और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ खड़ा हुआ। यही कारण है कि सोमनाथ को पुनर्निर्माण, पुनर्जागरण और आत्मबल का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य केवल इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देना भी है कि भारत की सांस्कृतिक चेतना को किसी भी प्रकार की हिंसा या आक्रमण से कभी समाप्त नहीं किया जा सकता। सोमनाथ का हर पुनरोद्धार इस बात का प्रमाण है कि हमारी आस्था शाश्वत है और हमारी सांस्कृतिक एकता समय के हर संकट से मजबूत होकर उभरी है।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं, इतिहासकारों, संस्कृति प्रेमियों और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखी जा रही है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विचार गोष्ठियां और प्रदर्शनी आयोजित की जा रही हैं, जिनमें सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास, संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथा को प्रस्तुत किया जा रहा है।
सोमनाथ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की एकता और अखंडता का भी प्रतीक है। अरब सागर के तट पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग आज भी लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और प्रेरणा प्रदान करता है। यहां आने वाला हर भक्त इतिहास की उन परतों को महसूस करता है, जिन्होंने भारत को कभी झुकने नहीं दिया।
इस पर्व के दौरान लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपनी सोमनाथ यात्राओं की यादगार तस्वीरें और अनुभव #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के साथ साझा करें, ताकि यह राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव जन-जन तक पहुंचे।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि आस्था केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, एकता और राष्ट्रबोध का आधार भी है। हजार वर्षों का इतिहास गवाही देता है कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है—अडिग, अमर और अविचल।


