नई दिल्ली। देश को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर करने के लिए आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन की भूमिका पर कल अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों के साथ एक महत्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक संवाद आयोजित किया गया। इस संवाद के दौरान विशेषज्ञों ने ‘आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत का एजेंडा’ विषय पर अपने बहुमूल्य विचार साझा किए।
चर्चा में प्रतिभागियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए विनिर्माण, नवाचार, कौशल विकास, तकनीकी अपनाव और निवेश-अनुकूल नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ आत्मकेंद्रित होना नहीं, बल्कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में प्रतिस्पर्धात्मक भागीदारी के साथ घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना है।
संवाद के दौरान कृषि से उद्योग और सेवा क्षेत्र तक संरचनात्मक परिवर्तन को गति देने, एमएसएमई को सशक्त बनाने, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार तथा समावेशी विकास को प्राथमिकता देने जैसे विषयों पर भी गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों का मत था कि सतत विकास के लिए नीति-नियोजन में नवाचार, सुशासन और मानव संसाधन विकास की अहम भूमिका होगी।
इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों के बीच सहयोग से ही ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार किया जा सकता है। संवाद से प्राप्त सुझाव और दृष्टिकोण आने वाले समय में नीति निर्माण और आर्थिक सुधारों को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे।
Had an insightful interaction with economists and experts yesterday. They shared valuable perspectives relating to the theme of ‘Aatmanirbharta and Structural Transformation: Agenda for Viksit Bharat.’https://t.co/dSOvpyBImM https://t.co/Tn25Izt7ww pic.twitter.com/evJvfwE7mV
— Narendra Modi (@narendramodi) December 31, 2025


