गुवाहाटी। असम आंदोलन के दौरान दिए गए बलिदान असम की पहचान और उसकी सामूहिक स्मृति का अभिन्न हिस्सा हैं। यह आंदोलन न केवल राज्य के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था, बल्कि इसने असमिया अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए जनचेतना को भी नई दिशा दी।
वक्ताओं ने कहा कि असम आंदोलन के दौरान अनेक लोगों ने अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसे राज्य कभी भुला नहीं सकता। इन शहीदों की कुर्बानियां आज भी असम के लोगों को एकजुट रहने, अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और राज्य के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती हैं।
इस अवसर पर यह भी दोहराया गया कि Assam की प्रगति, समृद्धि और सांस्कृतिक गौरव के लिए प्रतिबद्धता अटूट है। राज्य के विकास, युवाओं के सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए निरंतर परिश्रम करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा। साथ ही यह संकल्प व्यक्त किया गया कि असम को शांति, प्रगति और सांस्कृतिक समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे।
The sacrifices made during the Assam movement are an integral part of Assam’s identity and collective memory. We remain resolute in our commitment to working tirelessly for Assam’s progress, prosperity and cultural pride. pic.twitter.com/95lTa1hNMx
— Narendra Modi (@narendramodi) December 21, 2025


