हिंदी साहित्य के महान हस्ताक्षर, ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित तथा ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से अलंकृत मैथिलीशरण गुप्त जी की पुण्यतिथि पर आज उन्हें स्नेहसिक्त श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अपनी ओजस्वी एवं राष्ट्रभक्तिपूर्ण काव्य-रचनाओं के माध्यम से गुप्त जी ने न केवल सामाजिक चेतना को स्वर दिया, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस में साहस और देशभक्ति का संचार भी किया।
उनकी अमर कृति ‘भारत-भारती’ सहित अनेक रचनाएँ भारतीय समाज, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का अद्भुत प्रतिबिंब हैं, जो आज भी पाठकों को प्रेरित करती हैं। गुप्त जी की साहित्यिक संवेदना, सरल भाषा और काव्य की गहराई ने उन्हें हिंदी साहित्य के शीर्ष शिखर पर प्रतिष्ठित किया।
पुण्यतिथि के अवसर पर विभिन्न साहित्यिक संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और साहित्य प्रेमियों द्वारा उनके योगदान को याद करते हुए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त जी की रचनाएँ भावी पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जागरूकता और मानवता के उच्च आदर्शों का संदेश देती रहेंगी।
राष्ट्रकवि गुप्त जी की साहित्यिक विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और भारतीय मन को ऊर्जा प्रदान करती है। उनकी स्मृति में दिया गया यह श्रद्धा-सुमन सदैव साहित्य और संस्कृति के मार्गदर्शन में उजास भरता रहेगा।
अपनी अनूठी काव्य प्रतिभा से जनमानस में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने वाले हिंदी साहित्य के अनमोल रत्न, ‘पद्मभूषण’ 'राष्ट्रकवि' मैथिलीशरण गुप्त जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
भारतीय समाज और संस्कृति को प्रतिबिंबित करने वाली उनकी अमर रचनाएँ सदैव हम सभी के लिए… pic.twitter.com/C6GHk7iLiS
— Manohar Lal (@mlkhattar) December 12, 2025


