लगभग दो सप्ताह पहले कोयंबटूर में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन ने देशभर में कृषि संबंधी नई सोच और नवाचार को एक नई दिशा दी। सम्मेलन में उपस्थित प्रतिभागियों के बीच प्राकृतिक खेती के महत्व, उसकी उपयोगिता और उससे होने वाले पर्यावरणीय व आर्थिक लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सम्मेलन में शामिल एक वरिष्ठ नेता/अधिकारी द्वारा अपने अनुभव और विचारों को हाल ही में LinkedIn पोस्ट के माध्यम से साझा किया गया है। उन्होंने बताया कि कोयंबटूर में हुए इस आयोजन ने उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा और प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर अपनाने की आवश्यकता को और मजबूती दी।
उन्होंने अपनी पोस्ट में देशवासियों को प्राकृतिक खेती बढ़ाने के लिए स्पष्ट और प्रभावी आह्वान (clarion call) किया है। उनका कहना है कि रासायनिक खादों पर निर्भरता कम कर, मिट्टी की सेहत को पुनर्जीवित करते हुए, पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना समय की माँग है।
सम्मेलन में उठाए गए मुख्य बिंदु—
प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता में वृद्धि
किसानों की लागत में कमी और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार
रासायनिक तत्वों के उपयोग में कमी से पर्यावरण एवं स्वास्थ्य को लाभ
स्थानीय बीज, गोवंश आधारित खाद और प्राकृतिक संसाधनों का अधिक उपयोग
जल संरक्षण और सतत कृषि मॉडल को बढ़ावा
विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी मॉडल बन रही है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पारिस्थितिकी की नींव भी रखती है।
Two weeks ago, I was at a Summit on Natural Farming in Coimbatore, which left a lasting impression on my mind. Expressed a few thoughts on it in this LinkedIn Post, with a clarion call to people across India to increase natural farming. Have a look.https://t.co/8JVS3MaJ8d…
— Narendra Modi (@narendramodi) December 3, 2025


