पिछले छह से सात वर्षों में भारत ने अपने अंतरिक्ष क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन किए हैं, जिससे स्पेस सेक्टर एक खुले, सहयोगी और नवाचार-प्रधान इकोसिस्टम के रूप में उभर कर सामने आया है। सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधारों, निजी क्षेत्र के लिए बढ़ते अवसरों और नई नीतियों ने भारत की अंतरिक्ष प्रगति को नई दिशा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन-स्पेस (IN-SPACe) और न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) जैसी संस्थाओं की स्थापना ने भारत की स्पेस इंडस्ट्री को नए आयाम दिए हैं। इन सुधारों ने निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और वैश्विक साझेदारों के लिए व्यापक अवसर खोले हैं, जिससे नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है।
स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट लॉन्चिंग, डेटा सेवाओं, रिमोट सेंसिंग और नेविगेशन के क्षेत्र में भारत की क्षमताएँ तेजी से बढ़ी हैं। हाल के वर्षों में देश में कई स्पेस स्टार्टअप्स उभरे हैं, जो इस नए इकोसिस्टम का हिस्सा बनकर विश्व स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, सरकार की दूरदर्शी नीति और इसरो के अनुभव ने साथ मिलकर स्पेस सेक्टर में नई ऊर्जा का संचार किया है। इससे भारत वैश्विक स्पेस अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में तेजी से उभर रहा है।
भारत का यह परिवर्तन न केवल देश की वैज्ञानिक प्रगति को दर्शाता है, बल्कि भविष्य में स्पेस टेक्नोलॉजी और उद्योग क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की क्षमता भी प्रदर्शित करता है।
In just the last six to seven years, India has transformed its space sector into an open, cooperative and innovation-driven ecosystem. pic.twitter.com/SHPWkZXNnN
— PMO India (@PMOIndia) November 27, 2025


