संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्र के नागरिकों को संबोधित एक विशेष पत्र जारी किया गया, जिसमें भारतीय संविधान की महानता, मौलिक कर्तव्यों के महत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।
पत्र में कहा गया कि भारत का संविधान केवल शासन की रूपरेखा नहीं, बल्कि वह जीवन-दर्शन है जो हर नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। लेखक ने संविधान को ऐसे महान ग्रंथ की संज्ञा दी है, जिसने भारत की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती प्रदान की है।
पत्र में युवाओं, विशेषकर पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों से लोकतंत्र के इस पर्व को उत्सव की तरह मनाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में नागरिकों का सबसे शक्तिशाली योगदान है। नए मतदाताओं से आग्रह किया गया कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाएं।
इसके साथ ही पत्र में मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने और समाज में आदर्श नागरिक बनने की बात कही गई। लेखक ने कहा कि जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों और अधिकारों के बीच संतुलन बनाते हुए कार्य करेगा, तब ही विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकेगा।
संविधान दिवस पर जारी इस पत्र को देशभर के नागरिकों ने सराहा और इसे प्रेरणादायक व मार्गदर्शक बताया।
संविधान दिवस पर मैंने देशभर के अपने परिवारजनों के नाम एक पत्र लिखा है। इसमें हमारे संविधान की महानता, जीवन में मौलिक कर्तव्यों का महत्त्व और हमें पहली बार मतदाता बनने का उत्सव क्यों मनाना चाहिए, ऐसे कई विषयों पर अपने विचार साझा किए हैं…https://t.co/6SsfdWIUsO
— Narendra Modi (@narendramodi) November 26, 2025


