World Bank Report: दक्षिण एशियाई देशों का टैक्स रेवेन्यू अन्य विकासशील देशों से कम है। दक्षिण एशिया में यह जीडीपी का सिर्फ 18% है, जबकि अन्य देशों में यह औसतन 24% है।
World Bank Report: अमेरिका और चीन के व्यापार संघर्ष के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को बुरी खबर मिली है। वास्तव में, विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर वित्त वर्ष 2025–2026 के लिए ग्रोथ रेट को 6.7 प्रतिशत से 6.3 प्रतिशत कर दिया है।
दअसल, विश्व बैंक की हालिया साउथ एशिया डेवलपमेंट रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक पूंजी निवेश में अपेक्षा से कम प्रगति, वैश्विक आर्थिक कमजोरी और नीतिगत अनिश्चितता भारत की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट का कारण हैं।
रिपोर्ट क्या कहती है?
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में वृद्धि 6.5% रहने की संभावना है, लेकिन अगले वर्ष वृद्धि 6.3% हो सकती है। नियामकीय सुधार और मौद्रिक सहजता निजी निवेश को कुछ सहारा दे सकते हैं, लेकिन घरेलू नीति की अनिश्चितता और वैश्विक मंदी इसका असर कम कर सकते हैं।
IMF ने भी घटाया भारत का GDP अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पहले भी भारत की विकास दर का अनुमान घटाकर 6.5 प्रतिशत से 6.2 प्रतिशत कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी वैश्विक आर्थिक ग्रोथ का अनुमान बदला है, जो अब 2.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद करता है, जो पहले 3.3 प्रतिशत था।
भारत और चीन दुनिया की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे
चीन (23 प्रतिशत) और भारत (15 प्रतिशत) अगले पांच वर्षों में विश्व वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान देंगे, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के अनुसार। अमेरिका की हिस्सेदारी, हालांकि, 11.3% रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 तक दक्षिण एशिया की समग्र ग्रोथ रेट 5.8% रहने का अनुमान है, जो पिछले अनुमान से 0.4% कम है। लेकिन इसमें कुछ सुधार की उम्मीद है, 2026 में 6.1% तक पहुंच सकता है।
अन्य बड़े देशों का अनुमानित विकास
बांग्लादेश: FY24/25 में 3.3 फीसदी, अगली वर्ष बढ़कर 4.9 फीसदी
पाकिस्तान: FY24/25 में 2.7 फीसदी, FY25/26 में 3.1 फीसदी
श्रीलंका: FY25 में 3.5 फीसदी, FY26 में 3.1 फीसदी
टैक्स रेवेन्यू की कमी
रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य विकासशील देशों की तुलना में दक्षिण एशियाई देशों का टैक्स रेवेन्यू कम है। दक्षिण एशिया में यह जीडीपी का सिर्फ 18% है, जबकि अन्य देशों में यह औसतन 24% है। विशेष रूप से कंजम्पशन टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स और व्यक्तिगत आयकर में कमी आई है।
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