सावन 2025 में शिवलिंग की आधी परिक्रमा का महत्व जानें। उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, पूरी परिक्रमा करने से दोष लग सकता है। मंदिर में पूजा के दौरान सही परिक्रमा नियम और लाभ पढ़ें।
सावन के पवित्र माह में शिवलिंग की पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व होता है। उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज बताते हैं कि शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं, बल्कि आधी परिक्रमा करना ही धार्मिक नियमों के अनुसार सही है। शिवलिंग की परिक्रमा बाईं ओर से शुरू कर केवल आधी चंद्राकार परिक्रमा करनी चाहिए। पूरा चक्कर लगाने पर जलधारी यानी जहां से जल बहता है, उसे पार करना माना जाता है, जिससे दोष लग सकता है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद उस जलधारी को लांघना वर्जित है। यदि गलती से ऐसा हो जाए तो यह ऊर्जा शरीर में नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और शारीरिक मानसिक बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सावधानीपूर्वक आधी परिक्रमा करना चाहिए।
परिक्रमा से न केवल दोष से बचाव होता है, बल्कि यह श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक भी है। मंत्र जाप के साथ की गई परिक्रमा से व्यक्ति की सभी बुरी शक्तियां और पाप नष्ट होते हैं, साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर मंत्र याद न हो तो उस मंदिर के भगवान का नाम स्मरण करना भी लाभकारी माना जाता है।
आचार्य आनंद भारद्वाज का कहना है कि सावन में शिव की आधी परिक्रमा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए शिवलिंग की परिक्रमा करते समय इन नियमों का पालन करना आवश्यक है।


