उत्तराखंड में आज राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां उस समय तेज हो गईं, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर राज्य दौरे पर पहुंचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं मौजूद रहकर तीनों नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया।
इस दौरान तीनों नेता हरिद्वार पहुंचे, जहां सप्तऋषि क्षेत्र में आयोजित त्रिदिवसीय धार्मिक महोत्सव में उन्होंने भाग लिया। इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड के चार धाम देश की आध्यात्मिक परंपरा की रीढ़ हैं और इनका संरक्षण व विकास राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में देश की सांस्कृतिक विरासत को लेकर जागरूकता और सम्मान दोनों बढ़े हैं।
हरिद्वार कार्यक्रम के बाद योगी आदित्यनाथ का दौरा उनके पैतृक क्षेत्र पंचूर की ओर भी प्रस्तावित है, जहां वे एक शैक्षणिक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस मौके पर स्थानीय शैक्षणिक संस्थान में नवनिर्मित कक्षाओं का लोकार्पण किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र से उनका गहरा जुड़ाव रहा है और शिक्षा से जुड़े इस आयोजन को वे व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण मानते हैं।
राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इस पूरे दौरे को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात प्रबंधन और स्थानीय सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यमकेश्वर और आसपास के इलाकों में अस्थायी व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस तरह के उच्चस्तरीय दौरे राज्य के विकास, शिक्षा और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने में सहायक होते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के आपसी सहयोग से उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे और सामाजिक क्षेत्रों में तेजी से प्रगति होगी।
इस दौरे को न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्राथमिकता मिल रही है।


