उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक मानवीय और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत इन परिवारों को 0.50 एकड़ भूमि 30 वर्षों के पट्टे पर प्रदान की जाएगी, जिसे आगे चलकर 90 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। सरकार का यह कदम वर्षों से अस्थायी जीवन जी रहे इन परिवारों को स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक ठिकाना देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ये परिवार दशकों पहले धार्मिक उत्पीड़न और असुरक्षा के चलते बांग्लादेश से भारत आए थे। लंबे समय से ये लोग अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी बस्तियों में जीवन यापन कर रहे थे, जहां उन्हें न तो भूमि का अधिकार था और न ही स्थायित्व की कोई गारंटी। योगी सरकार के इस निर्णय से अब इन परिवारों को भविष्य की सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन की नई उम्मीद मिली है।
पुनर्वासन योजना के तहत इन परिवारों को आवासीय उपयोग के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने घर बना सकें और एक स्थिर सामाजिक जीवन की शुरुआत कर सकें। सरकार का मानना है कि केवल जमीन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिजली, पानी, सड़क और अन्य आवश्यक सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय सिर्फ पुनर्वासन तक सीमित नहीं है, बल्कि इन परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम है। पट्टे की अवधि को 90 साल तक बढ़ाने का प्रावधान इस बात का संकेत है कि सरकार इन्हें दीर्घकालिक स्थिरता देना चाहती है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकें।
इस फैसले का सामाजिक और मानवीय महत्व भी काफी बड़ा है। वर्षों से पहचान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे इन परिवारों को अब कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त ठिकाना मिलेगा। इससे बच्चों की शिक्षा, रोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा तक उनकी पहुंच आसान होगी।
योगी आदित्यनाथ सरकार पहले भी विस्थापितों, शरणार्थियों और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए कई कदम उठा चुकी है। इस निर्णय को उसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पीड़ित समुदाय को राहत देने का प्रयास किया है। सरकार का कहना है कि यह पहल “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को जमीन पर उतारने का उदाहरण है।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश से विस्थापित 99 हिंदू परिवारों के पुनर्वासन का यह फैसला न केवल उन्हें स्थायी ठिकाना देगा, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता भी सुनिश्चित करेगा। यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और समावेशी विकास की सोच को दर्शाता है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


