“आरबीआई की 90वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में मंगलवार को उन्होंने कहा, ‘‘इसे एक उपलब्धि समझते हुए हम मानते हैं कि आरबीआई की भूमिका प्रारंभिक लक्ष्यों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित हुई है‘’
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से पहले खुले बाजार परिचालन के जरिए बैंकिंग प्रणाली को 80 हजार करोड़ रुपये देने का घोषणा किया। आरबीआई का कहना है कि उसके इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की सामान्य स्थिति सुधरेगी। उसने ओएमओ को बताया कि रिजर्व बैंक बढ़ती नकदी और मार्केट की बदलती स्थितियों पर नज़र रखेगा, ताकि समुचित स्थिति का आकलन किया जा सके।
आरबीआई की यह कार्रवाई बैंकों को नीतिगत ब्याज दरों में कमी का लाभ देने के लिए की गई है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि ओएमओ की खरीद का संकेत है कि रिजर्व बैंक का मुख्य लक्ष्य बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी कायम रखना है।
नकदी पर आरबीआई का फोकस
IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने बिजसने स्टैंडर्ड को बताया कि पहले की परिस्थितियों से ये स्पष्ट होता है कि नकदी एक लाख करोड़ से दो लाख करोड़ तक रहने पर ही बदलता है, इसलिए आरबीआई अपने लाभांश के चलते इन गतिविधियों को कम कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई की कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि वह बदलाव के लिए पर्याप्त नकदी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इधर, आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने और विनियामक ढांचे को लचीला बनाने के लिए केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अगला दशक महत्वपूर्ण होगा
“इसे एक उपलब्धि समझते हुए हम मानते हैं कि आरबीआई की भूमिका प्रारंभिक लक्ष्यों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित हुई है,” उन्होंने मंगलवार को आरबीआई की 90वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में कहा। “आज हम परंपरा व परिवर्तन के संगम पर खड़े हैं..। जहां तेजी से बढ़ती प्रौद्योगिकी, वैश्विक अनिश्चितताओं, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और बढ़ती सार्वजनिक अपेक्षाओं के साथ मूल्य स्थिरता, वित्तीय स्थिरता और आर्थिक वृद्धि की आवश्यकताएं जुड़ती हैं‘’
गवर्नर ने कहा कि अगला दशक भारतीय अर्थव्यवस्था का वित्तीय निर्माण करने में महत्वपूर्ण होगा। वित्तीय समावेश को बढ़ाना आरबीआई का लक्ष्य है। “हम ग्राहक सेवाओं में निरंतर सुधार तथा उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे,” उन्होंने बताया। वित्तीय स्थिरता और दक्षता के लाभों को संतुलित करके हमारे नियामक ढांचे को लचीला बनाना हमारा लक्ष्य होगा। हम नवाचार और प्रौद्योगिकी का समर्थन करना जारी रखेंगे। हम सतर्क, लचीले और योजनाबद्ध रहेंगे।‘’
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