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  • CM Dr. Yadav: राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है हमारा लक्ष्य

    CM Dr. Yadav: राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है हमारा लक्ष्य

    CM Dr. Yadav ने कोलकाता में उद्योग समूहों के प्रमुखों से की वन-टू-वन चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों के समग्र विकास के लिये विभिन्न औद्योगिक समूहों के प्रमुखों से निरंतर वन-टू-वन चर्चा विभिन्न मंचों पर की जा रही है। इससे प्रदेश के विकास को गति मिलेगी। वन-टू-वन चर्चा से उद्योगपतियों को उद्योग स्थापना में आने वाली दिक्कतों एवं उनके निराकरण पर सकारात्मक चर्चा कर निराकरण भी हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी क्रम में शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में 31 प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की।

    CM Dr. Yadav ने वन-टू-वन चर्चा में उद्योगपतियों के सुझाव पर उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी बातों पर न केवल गंभीरता से विचार किया जायेगा, बल्कि प्रदेश के विकास के लिये “आउट ऑफ द वे” जाकर निराकरण भी किया जायेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन-टू-वन बैठक के माध्यम से विभिन्न उद्योगपतियों से उनकी आवश्यकताओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। डॉ. यादव ने राज्य में निवेश की नीतियों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की प्रतिबद्धता जताई और सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सुविधाओं और प्रोत्साहनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य राज्य में उद्योगों के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करना है, जिससे न केवल स्थानीय व्यवसायों को फायदा हो, बल्कि बाहरी निवेशक भी प्रोत्साहित होकर मध्यप्रदेश में आकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ायें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोलकाता के इंटरैक्टिव सेशन में प्रमुख रूप से श्री राजीव मुंद्रा – चैयरमेन जेएमएस माइनिंग, श्री अश्विन जेलोढ़ा – एमडी और सीईओ ओरिएंट पेपर मिल, श्री इंद्रजीत मुखर्जी – वाईस चैयरमैन टेक्स्मॉको रेल और इंजीनियरिंग लिमिटेड, श्री विनोद कुमार गुप्ता – एमडी डॉलर उद्योग, श्री आपरेश अग्रवाल – एमडी रूपा उद्योग, श्री अनुराग चौधरी सीएमडी एवं श्री अरूण कुमार शुक्ला अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड सहित फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक एवं पैकेजिंग, मैटल, केमिकल एवं बैटरी, सीमेंट एवं जूट खनन, आयरन एवं स्टील, पॉवर सीमेंट, नवकरणीय ऊर्जा, अधोसंरचना विकास, रेलवे वैगन एवं उपकरण, पेपर एवं पल्प, टेक्सटाइल, लॉजिटिक्स एवं वेयर हाउसिंग एवं एविएशन, टेक्सटाइल एवं गारमेंट, पॉलीमर कम्पाउंड, हास्पिटेलिटी, लुब्रीकेंटस, होम केयर एवं ईवी प्रोडक्ट, सौर ऊर्जा, पशु आहार आदि सेक्टर से संबंधित 31 उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा की। चर्चा में उद्योगपतियों ने भी अपने विचार साझा किए और राज्य में निवेश करने की संभावनाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार विभिन्न उद्योगों के बीच समन्वय बढ़ाने और नई योजनाओं को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी उद्योगपतियों को राज्य में अधिक से अधिक निवेश करने और सरकार के विकासात्मक एजेंडे में भागीदार बनने का निमंत्रण दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद करेगी, बल्कि राज्य को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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  • मुख्यमंत्री Dr. Yadav ने इंदौर में अत्याधुनिक 128 स्लाइस सी.टी. स्कैन मशीन का लोकार्पण किया

    मुख्यमंत्री Dr. Yadav ने इंदौर में अत्याधुनिक 128 स्लाइस सी.टी. स्कैन मशीन का लोकार्पण किया

    CM Dr. Yadav

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर के सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय में  अत्याधुनिक 128 स्लाइस सी.टी. स्कैन मशीन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री Dr. Yadav ने सी.टी. मशीन के संबंध में विस्तृत जानकारी भी ली। उल्लेखनीय है कि यह अत्याधुनिक सी.टी. स्कैन मशीन पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा सीएसआर अंतर्गत प्रदत्त की गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस यह सीटी स्कैन मशीन इंदौर और आस-पास के लोगों के लिये वरदान साबित होगी। साथ ही पीजी की पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी शिक्षण में लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अपना इंदौर पूरे देश में स्वच्छता, सुशासन और स्वाद का उदाहरण बन चुका है। मुझे इस बात का पूरा विश्वास है कि ये शहर आने वाले समय में स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मील का पत्थर स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां मैं विशेष तौर पर ये उल्लेख करना चाहता हूँ कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गरीबों के दुखों को महसूस करते हैं और यही वजह है कि सबके सिर पर छत, सबके घर अन्न, सब बच्चों को शिक्षा और सबको नि:शुल्क इलाज उनकी प्राथमिकता है। दो दिन पहले ही केन्द्र सरकार ने निर्णय लिया है कि अब आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को 5 लाख तक के नि:शुल्क उपचार का लाभ मिलेगा।

    सी.टी. स्कैन मशीन के लोकार्पण अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायकगण श्री मधु वर्मा, श्री मनोज पटेल तथा श्री गोलू शुक्ला, श्री गौरव रणदिवे सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे। इस अवसर पर संभागायुक्त  श्री दीपक सिंह, पुलिस कमिश्नर श्री राकेश गुप्ता, कलेक्टर श्री आशीष सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री शिवम वर्मा, पावर कॉरपोरेशन ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड के अधिकारी गण, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित, सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. सुमित शुक्ला सहित अन्य चिकित्सक एवं अस्पताल स्टाफ आदि उपस्थित थे।

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  • CM Dr. Yadav: स्वच्छ भारत मिशन में नवाचारों के साथ मध्यप्रदेश ने रचे नये कीर्तिमान

    CM Dr. Yadav: स्वच्छ भारत मिशन में नवाचारों के साथ मध्यप्रदेश ने रचे नये कीर्तिमान

     CM Dr. Yadav: स्वच्छ भारत मिशन की 10वीं वर्षगाँठ

     

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देश में शुरू हुए स्वच्छता अभियान में मध्यप्रदेश अनेक कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। प्रधानमंत्री की मंशानुरूप प्रदेशवासियों ने पूरे उत्साह और जन-सहयोग से स्वच्छता के क्षेत्र में नये आयाम भी स्थापित किये हैं। इसमें जहाँ एक ओर वर्ष 2022 के स्वच्छ सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश को सबसे स्वच्छतम राज्य का दर्जा मिला, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के इंदौर शहर ने लगातार 7वीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव प्राप्त किया। इसके साथ ही वर्ष 2023 में प्रदेश में गीले कचरे से बॉयो सीएनजी का उत्पादन करने का अभिनव नवाचार भी हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्म-दिन 17 सितम्बर से स्वच्छता ही सेवा अभियान शुरू हो रहा है। यह अभियान 2 अक्टूबर महात्मा गाँधी की जयंती तक चलेगा। इस वर्ष अभियान की थीम “स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता’’ रखी गयी है। स्वच्छता ही सेवा अभियान में अधिक से अधिक जन-भागीदारी और स्थानीय निकायों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। मध्यप्रदेश ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) में कई मामलों में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। प्रदेश के सभी शहरों ने पिछले 10 वर्षों के दौरान अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास किये हैं। जनता के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस बार भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जन-भागीदारी के साथ बड़े पैंमाने पर स्वच्छता संबंधी विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जायेगी।

    स्वच्छता के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

    स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार-2023 में इंदौर शहर को लगातार 7वीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है। यह इंदौर के नागरिकों की जन-भागीदारी का बेहतरीन उदाहरण है। मध्यप्रदेश कम लागत पर एसटीपी इंसेप्शन एण्ड डायवर्सन आधारित सीवेज उपचार प्रणाली के लिये दिशा-निर्देश तैयार करने और कार्यादेश जारी करने वाला पहला राज्य है। इस वर्ष मार्च-2024 में मध्यप्रदेश ने नगरीय निकायों के लिये “उपयोगिता जल और सेप्टेज प्रबंधन नीति’’ प्रकाशित की है, जिसमें सीवर और सैप्टिक टैंकों की मशीनीकृत सफाई 100 प्रतिशत सुनिश्चित की गयी है। इंदौर वाटर प्लस प्रमाणन और 7 स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाला देश का पहला शहर है। हाल ही में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2024 में जबलपुर को 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिये देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।

    शत-प्रतिशत मोटराइज्ड वाहनों से कचरा संग्रहण

    प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में 7 हजार 82 से अधिक मोटराइज्ड वाहनों से कचरा संग्रहण व्यवस्था का संचालन किया जा रहा है। इनमें सूखे, गीले, घरेलू हानिकारक और सेनेटरी अपशिष्ट को अलग-अलग रखने के लिये कम्पार्टमेंट बनाये गये हैं। जीपीएस और पीए सिस्टम से वाहनों की निगरानी और स्वच्छता विषयों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। गीले कचरे के प्र-संस्करण और निष्पादन के लिये स्पॉट कम्पोजिटिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 850 से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पादकों द्वारा स्पॉट कम्पोजिटिंग की जा रही है। प्रदेश में फीकल स्लज के निष्पादन को प्राथमिकता देते हुए 368 नगरीय निकायों में 399 एफएसटीपी और 20 निकायों में 55 एसटीपी संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में 401 नगरीय निकाय 368 केन्द्रीयकृत इकाइयों से कम्पोजिटिंग कर रहे हैं। सूखे कचरे के प्र-संस्करण के लिये 401 नगरीय निकायों में 360 मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी इकाइयों का निर्माण किया गया है।

     गीले कचरे से बॉयो सीएनजी का उत्पादन

    निकायों में लीगेसी वेस्ट को वैज्ञानिक तरीके से खत्म करने की दिशा में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश के 108 नगरीय निकायों के लीगेसी वेस्ट का उपचार किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के पहले चरण में 50 नगरीय निकायों ने अपने लीगेसी वेस्ट का पूर्ण निपटान कर लिया है। गीले कचरे की कम्पोजिटिंग के लिये कटनी और सागर में अत्याधुनिक स्व-चलित इकाइयाँ कार्य कर रही हैं। इन इकाइयों में 16 शहरों से कचरा लाकर उसे कम्पोस्ट में बदला जा रहा है। इंदौर में गीले कचरे से बॉयो सीएनजी तैयार करने के लिये 550 टन प्रतिदिन क्षमता की गोवर्धन इकाई काम कर रही है। रीवा और जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की इकाइयाँ भी चल रही हैं। इन इकाइयों में प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। प्रदेश के 10 निकायों के लिये क्लस्टर आधारित 1019 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिये केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इंदौर और उज्जैन में 660 टन कचरे से बिजली बनाने का काम प्रस्तावित है। इस यूनिट में करीब 12.15 मेगावॉट बिजली पैदा होगी। इन सब कामों से प्रदेश के नगरीय निकाय वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्म-निर्भर बन सकेंगे।

    स्वच्छ सर्वेक्षण में हासिल की नई ऊँचाइयाँ

    स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में मध्यप्रदेश को देश के सबसे स्वच्छतम राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ है। वहीं स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे स्वच्छतम राज्य घोषित किया गया है। स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश को 7 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। प्रदेश के 361 निकाय ओडीएफ डबल प्लस, 3 निकाय ओडीएफ प्लस और 7 निकाय को ओडीएफ का प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। नगरीय निकायों में अपशिष्ट जल के शोधन एवं उपचारित जल के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिये 7 निकायों को वाटर प्लस का प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। अब तक प्रदेश के 384 निकायों द्वारा स्वयं को सीपीएचईईओ मानदण्डों के आधार पर संरक्षित शहर घोषित किया गया है।

    स्वच्छ सर्वेक्षण-2024

    खुले में शौच से मुक्त शहरों की श्रेणी में 27 शहरों को वाटर प्लस और शेष सभी शहरों को डबल प्लस, वहीं कचरा मुक्त स्टार प्रमाणीकरण के लिये सभी शहरों को कम से कम 3 स्टार से प्रमाणित किये जाने का लक्ष्य तय किया गया है।

    नवाचार एवं उत्कृष्ट प्रयास

    प्रदेश में स्वच्छता विषयों के प्रति जागरूकता लाने के लिये स्वच्छता की पाठशाला नामक गतिविधि शुरू की गयी है। इसके लिये अब तक 388 प्रशिक्षण सत्रों में 44 हजार 639 सफाई मित्रों, 2004 अधिकारियों, 243 जन-प्रतिनिधियों और 200 अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिलाया गया है। आपसी अनुभव से सीखने की प्रक्रिया को सशक्त करने के मकसद से प्रतिदिन स्वच्छता संवाद परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है। सफाई मित्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन के सहयोग से सफाई मित्रों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिये शिविर लगाये गये। इनमें 44 हजार 701 सफाई मित्रों और उनके परिवार को फायदा पहुँचाया गया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता से जुड़े प्रमुख विषयों पर 10 से अधिक ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किये जा चुके हैं। हाल ही में आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में 16 प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की दिशा में 14 नगरीय निकायों और 311 निकायों में 600 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण के साथ सह एक्सपोजर विजिट कराया गया।

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  • CM Dr. Yadav – महेश्वर में होगी मंत्रि-परिषद की बैठक

    CM Dr. Yadav – महेश्वर में होगी मंत्रि-परिषद की बैठक

     CM Dr. Yadav

    लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के सम्मान में होगा आयोजन
    देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर में स्थापित होगी शोध पीठ
    मध्यप्रदेश पुलिस की बटालियन का नाम भी देवी अहिल्याबाई पर रखा जाएगा
    देवी अहिल्याबाई के व्यक्तित्व व कृतित्व को समग्र रूप से नई पीढ़ी के सामने लाया जाए
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वें जन्म शताब्दी के आयोजन के लिए गठित समारोह समिति की बैठक हुई

     CM Dr. Yadav ने कहा है कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के 300वें जन्म शताब्दी वर्ष में उनके प्रति सम्मान के प्रकटीकरण के लिए मंत्रि-परिषद की बैठक महेश्वर में आयोजित की जाएगी। देवी अहिल्या की न्यायप्रियता, शासन-प्रशासन में नवाचार, लोक कल्याण सहित उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व व कृतित्व पर शोध केलिए देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर में शोध पीठ स्थापित की जाएगी। देवी अहिल्या से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री के संकलन के लिए अभियान चलाया जाएगा। मध्यप्रदेश पुलिस की बटालियन का नाम भी देवी अहिल्याबाई पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बटालियनों के नाम महापुरूषों के नाम पर रखने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के 300वें जन्मशताब्दी के आयोजन के लिए गठित समारोह समिति की सुशासन भवन में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, परिवहन तथा स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में समिति के सदस्यगण ने आयोजन के संबंध में सुझाव रखे।

    विधवा विवाह को प्रोत्साहनखासगी प्रथा तथा माहेश्वरी साड़ी निर्माण में महिलाओं को जोड़ना महिला सशक्तिकरण का प्रतीक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर प्रसिद्ध तीर्थों और धार्मिक स्थानों में मंदिर, घाट, कुंए और बावड़ियों का निर्माण कराया तथा अन्न क्षेत्र का भी संचालन किया। उनका शासनकाल न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही महिला सशक्तिकरण के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी प्रासंगिक हैं। भारतीय जनमानस में उनके श्रेष्ठ, उत्तम और धर्म प्रधान गुणों की छाप विद्यमान है। विधवा विवाह को प्रोत्साहन व खासगी प्रथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य के उदाहरण हैं। माहेश्वरी साड़ियां बनाने से स्थानीय महिलाओं को जोड़कर उन्होंने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वें जन्मशताब्दी वर्ष पर उत्सवों के आयोजन के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का प्रकटीकरण किया जाए। इसके लिए शाला, महाविद्यालय, सार्वजनिक स्थलों पर गतिविधियों के साथ-साथ मीडिया के विभिन्न माध्यमों से देवी अहिल्याबाई होलकर से संबंधित जानकारियों का प्रसार किया जाए। लोकमाता देवी अहिल्याबाई के व्यक्तित्व व कृतित्व को समग्र रूप से नई पीढ़ी के सामने लाया जाए।

    जन्म शताब्दी वर्ष के लिए प्राप्त हुए समिति सदस्यों के सुझाव

    बैठक में आगामी गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम लोकमाता देवी अहिल्याबाई को समर्पित करने, ग्रामीण स्तर पर महिला नेतृत्व को चिन्हित कर पंचायत स्तर पर देवी अहिल्याबाई के नाम पर उन्हें सम्मानित करने, देवी अहिल्या की मोढ़ी लिपि में विद्यमान प्रशासनिक व साहित्यिक सामग्री का हिंदी व अंग्रेजी में अनुवाद करवाने, उन पर केन्द्रित स्मारिका प्रकाशित करवाने, शाला और महाविद्यालय स्तर पर देवी अहिल्याबाई पर केन्द्रित अकादमिक गतिविधियां संचालित करने, पाठ्यक्रम में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर पाठ का समावेश करने, शालाओं में छात्राओं के लिए आत्मरक्षा का पीरियड आरंभ करने, देवी अहिल्याबाई पर जाणता राजा के समान भव्य नाट्य प्रस्तुति तैयार कराने संबंधी सुझाव प्राप्त हुए।

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  • Dr. Mohan Yadav: विभिन्न जिलों में हुई घटनाओं की जानकारी प्राप्त कर कलेक्टर को दिए निर्देश

    Dr. Mohan Yadav: विभिन्न जिलों में हुई घटनाओं की जानकारी प्राप्त कर कलेक्टर को दिए निर्देश

    Dr. Mohan Yadav: मुख्यमंत्री, उज्जैन स्थित निवास से पूरे प्रदेश के संपर्क में हैं और अधिकारियों से निरंतर कर रहे हैं चर्चा
    धार जिले में बच्चों का जीवन बचाने वाले समाज सेवियों को किया जाएगा सम्मानित 

    मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने ग्वालियर, धार और झाबुआ जिलों में हुई विभिन्न घटनाओं के संबंध में तीनों जिलों के कलेक्टर से दूरभाष पर चर्चा कर जानकारी प्राप्त की और आम नागरिकों की राहत के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

    झाबुआ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने c को निर्देश दिए कि दो बच्चियों के बह जाने से उनके परिवार को चार-चार लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो यह भी ध्यान रखा जाए।

    ग्वालियर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर कलेक्टर से चर्चा कर ट्रॉमा सेंटर की घटना की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना न हो इस संबंध में सतर्कता रखी जाए और समस्त स्टॉफ सजग रह कर अपना दायित्व निर्वहन करें।

    धार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार जिले में डही विकासखंड के ग्राम बड़वानिया में जनजातीय बालक आश्रम परिसर में वर्षा जल भर जाने से विद्यार्थियों को हुए कष्ट के संबंध में जानकारी प्राप्त की। कलेक्टर ने बताया कि समय रहते हैं, बच्चों को बचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी घटनाओं का दोहराव न हो, इसके लिए सभी आवश्यक सावधानियां रखी जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की धार जिले की इस घटना में जिन सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों द्वारा सेवा प्रदान की गई और बच्चों की जीवन रक्षा के लिए सक्रियता एवं सजगता का परिचय दिया गया उन्हें राज्य सरकार पुरस्कृत और सम्मानित करेगी।

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिता का 3 सितंबर मंगलवार को अवसान हुआ है। आज बुधवार 4 सितंबर को पिता के अंतिम संस्कार के बाद उज्जैन स्थित निवास से उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों में घटित घटनाओं के संबंध में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर नागरिकों के हित में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पिता के अवसान के पश्चात शोक व्यक्त करने आए नागरिकों विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से भेंट कर राजधर्म का पालन करते हुए प्रदेश की स्थिति पर नजर भी रखे हुए हैं। वे निरंतर प्रशासनिक अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा भी कर रहे हैं।

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  • CM Dr. Mohan Yadav: इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना की स्वीकृति मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक सौगात

    CM Dr. Mohan Yadav: इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना की स्वीकृति मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक सौगात

    CM Dr. Mohan Yadav: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मुख्यमंत्री ने इन्दौर में प्रेस कांफ्रेंस कर जताया आभार

    CM Dr. Mohan Yadav ने कहा है कि इंदौर-मनमाड़ रेलवे परियोजना की स्वीकृति मध्यप्रदेश के लिए ऐतिहासिक निर्णय है। मध्यप्रदेश, देश के मध्य भाग में स्थित है। इसको देखते हुए यहां रेलवे के विकास की अपार संभावनाएं है। उन्होंने इंदौर-मनमाड़ परियोजना की स्वीकृति पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस रेलवे लाइन से मध्यप्रदेश के मालवा एवं निमाड़ अंचल के अनुसूचित जनजाति के लोगों का समुचित विकास होगा। यह परियोजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव का बड़ा माध्यम बनेगी। मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति के लोगों के जीवन में यह रेलवे लाइन एक नई शुरुआत करेगी। मालवा-निमाड़ क्षेत्र में रोजगार के साधन बढ़ेंगे। व्यापारिक, औद्योगिक, कृषि क्षेत्र का विकास होगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में लॉजिस्टिक हब बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि जहां से यह रेल लाइन जाएगी वहां समान रूप से राज्य शासन द्वारा भी विकास के कार्य किए जाएंगे। इस क्षेत्र को इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। हम संकल्प लेकर यह कार्य शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस रेलवे लाइन के बन जाने से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। चार ज्योतिर्लिंग परस्पर जुड़ जाएंगे। अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक भी आवागमन का सहज हो जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज यहां इंदौर में आयोजित प्रेस कांन्फ्रेस को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर सांसद श्री शंकर लालवानी, खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि  ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है उसमें देश के इन्फ्रा-स्ट्रक्चर को मजबूत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पिछले दस वर्षों में देश में कनेक्टिविटी बेहतर होने से विकास और रोजगार तेजी से बढ़ा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने रेलवे की कायापलट की है। देश अब बुलेट ट्रेन के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के दूरगामी विजन का लाभ मध्यप्रदेश को हर क्षेत्र में मिला है। प्रदेश में रेलवे के विकास के लिए केंद्रीय कैबिनेट द्वारा प्रधानमंत्री श्री मोदी की अध्यक्षता में इंदौर-मनमाड़ नई रेलवे लाइन परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह रेल लाइन परियोजना मालवा-निमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी की बड़ी सौगात है।

    केन्द्रीय रेल मंत्री श्री वैष्णव ने बताया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री के ‘पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के तहत विकसित की गई है, जो हमारे देश के लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने और नई कनेक्टिविटी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना की कुल लंबाई 309 किलोमीटर है, जो मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ेगी। परियोजना की कुल लागत 18,036.25 करोड़ रूपये है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के प्रमुख जिलों जैसे इंदौर, धार, खरगोन, और बड़वानी को सीधे महाराष्ट्र के नासिक और धुले जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन जिलों में आर्थिक और सामाजिक विकास को बल मिलेगा।

    यह परियोजना राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी, जिससे मध्यप्रदेश के प्रमुख जिलों का सर्वांगीण विकास संभव होगा। इस परियोजना के निर्माण के दौरान और पूर्ण होने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे राज्य के युवाओं को लाभ मिलेगा।

    इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन से औद्योगिक और कृषि उत्पादों के परिवहन में तेजी आएगी, जिससे किसानों और उद्योगपतियों को बड़ा लाभ मिलेगा। नासिक और धुले जैसे जिलों के प्याज उत्पादक हब और इंदौर के औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।

    इस नई रेल लाइन से उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और नासिक के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच की दूरी में कमी आएगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    बड़वानी जिला, जो कि एक आकांक्षी जिला है, पहली बार भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़े़गा। इससे इस क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं और आर्थिक विकास के लिए अवसर प्राप्त होंगे।

    परियोजना के अंतर्गत कई प्रमुख नदियों और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पुलों और सुरंगों का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे बेहतर इन्फ्रा-स्ट्रक्चर और यातायात सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

    देश में रेलवे का अमृत काल प्रधानमंत्री का विजन

    प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे को नए युग में प्रवेश करने का अवसर मिल रहा है। हर साल 5,000 किलोमीटर से अधिक नए ट्रैक का निर्माण और 1300 से अधिक स्टेशनों का पुनर्विकास हो रहा है, जो देश के परिवहन ढांचे को और भी मजबूत बनाएगा।

    परियोजना से मध्यप्रदेश के लिए लाभ

    इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 4 जिलों (बड़वानी, खरगोन, धार और इंदौर) को नई रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। लगभग 309 किलोमीटर की नई रेलवे लाइन से राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी. जिससे स्थानीय विकास को गति मिलेगी।

    राज्य के विकास में नया अध्याय

    इस परियोजना से 29 लाख लोगों को पहली बार रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जो राज्य के समग्र विकास और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

    18,036 करोड़ रूपये की इस परियोजना से राज्य के आर्थिक परिदृश्य में व्यापक सुधार होगा, जिससे नए उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

    आर्थिक विकास और रोजगार

    इंदौर और मुंबई जैसे दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने से बड़वानी और खरगोन जैसे औद्योगिक रूप से पिछड़े जिलों में भी आर्थिक विकास होगा। इंदौर के निकट स्थित औद्योगिक क्षेत्रों से उत्पन्न EXIM कार्गो के लिए जेएनपीए और पश्चिमी महाराष्ट्र के अन्य बंदरगाहों तक पहुँच के लिए यह एक छोटा और सीधा मार्ग प्रदान करेगा। परियोजना के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा, जो हमारे राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर होगा। 18036 करोड़ रुपये की यह परियोजना राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी, जिससे पर्यटन, उद्योग और कृषि क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे।

    कृषि और औद्योगिक विकास

    नासिक, धुले और नंदुरबार के प्याज उत्पादक हब को यह नई रेल लाइन वैकल्पिक और तेज़ परिवहन सुविधा प्रदान करेगी, जिससे किसानों को बड़ा लाभ होगा। मिलेट्स (ज्वार, मक्का) उत्पादक क्षेत्रों को भी पहली मील की कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादों का परिवहन और अधिक सुलभ होगा। इस नई रेल लिंक से मुंबई (व्हाया मनमाड) से इंदौर तक की यात्रा में 188 किलोमीटर की कमी आएगी, जिससे 4.5 घंटे कम समय में यात्रा पूर्ण हो सकेगी।

    पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा

    इस नई रेल लाइन से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को जेएनपीए और हजीरा पोर्ट तक सीधा कनेक्शन मिलेगा, जिससे महिंद्रा एंड महिंद्रा, वीई कमर्शियल व्हीकल्स (वोल्वो और आयशर के बीच JV), फोर्स मोटर्स, और राठी स्टील इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख उद्योगों को बड़ा फायदा होगा।

    बेहतर माल ढुलाई और वस्त्रों का परिवहन

    इस परियोजना से खाद्यान्न, वस्त्र, उर्वरक, इस्पात उत्पादों आदि का तेज गति से परिवहन और कुशल प्रबंधन हो सकेगा।

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

    उज्जैन-इंदौर क्षेत्र में प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुँच में सुधार होगा, जिससे पर्यटन और तीर्थ-यात्राओं में वृद्धि होगी। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों तक आसान और त्वरित पहुंच से राज्य का धार्मिक पर्यटन समृद्ध होगा।

    पर्यावरण संरक्षण

    इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन परियोजना पर्यावरण के अनुकूल है। इससे हर साल लगभग 138 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी, जो 5.5 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। साथ ही, 18 करोड़ लीटर हाई स्पीड डीजल आयात की बचत होगी, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

    आकांक्षी जिलों का विकास

    परियोजना से बड़वानी जैसे आकांक्षी जिलों को नई रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे जनजातीय सशक्तिकरण में मदद मिलेगी। इससे इन क्षेत्रों में पर्यटन और औद्योगिक विकास के साथ आर्थिक उन्नति के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

    भारतीय रेलवे की क्षमता में वृद्धि

    इस नई रेलवे लाइन से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में 26 मिलियन टन प्रति वर्ष की वृद्धि होगी, जिससे राज्य के उद्योगों को फायदा होगा। यह परियोजना उन क्षेत्रों को जोड़ने में सहायक होगी जो अब तक रेल नेटवर्क से जुड़े नहीं थे, जिससे लॉजिस्टिक में सुधार और बॉटलनेक्स को दूर किया जा सकेगा।

     समाज के सभी वर्गों के लिए फायदेमंद

    यह परियोजना जनजातीय क्षेत्रों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास को सुनिश्चित करेगी, जिससे समाज के सभी वर्गों को इसका लाभ मिलेगा।

    महाराष्ट्र में लाभ

    महाराष्ट्र के प्रमुख शहर जैसे मालेगांव, धुले, सिंधखेड़ा, शिरपुर और अन्य शहरों को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

    नासिक, धुले, और नंदुरबार जैसे प्याज उत्पादक हबों के लिए वैकल्पिक और तेज़ लॉजिस्टिक्स विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे किसानों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी।

    धार्मिक स्थलों तक आसान पहुँच

    महाराष्ट्र में त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, शिरडी साई मंदिर, और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुँच में सुधार होगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    मध्य भारत से महाराष्ट्र के विभिन्न बंदरगाहों जैसे मुंबई पोर्ट (MBPA) और जेएनपीए तक सीधा और छोटा मार्ग उपलब्ध होगा।

    औद्योगिक और कृषि विकास के लिए नए अवसर

    इंदौर और मुंबई के बीच इस नई रेल परियोजना से औद्योगिक और कृषि उत्पादों के लिए त्वरित और सुविधाजनक परिवहन मार्ग प्राप्त होगा, जिससे राज्य के आर्थिक विकास को बल मिलेगा महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक क्षेत्रों और मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस नई रेल मार्ग से लाभ होगा, जिससे लॉजिस्टिक में सुधार होगा।

    पर्यावरण और ऊर्जा की बचत

    इस नई रेल परियोजना से न केवल कार्गो की ढुलाई में वृद्धि होगी बल्कि CO2 उत्सर्जन में कमी और डीजल आयात की बचत भी होगी, जो पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

    राज्य के आर्थिक परिदृश्य में सुधार

    यह परियोजना न केवल दो प्रमुख राज्यों (महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश) को जोड़ने में सहायक होगी, बल्कि इससे राज्य के आर्थिक परिदृश्य में भी व्यापक सुधार होगा, जिससे अधिक से अधिक निवेश और उद्योगों की स्थापना हो सकेगी।

    इंदौर-मनमाड़ नई रेल परियोजना का कुल निवेश

    इस परियोजना का कुल निवेश 18,036.25 करोड़ रूपये है, जिसमें से मध्य प्रदेश के हिस्से का खर्च 13,628.20 करोड़ रूपये और महाराष्ट्र के हिस्से का खर्च 4.408.05 करोड़ रूपये है।

     मध्यप्रदेश का योगदान

    मध्यप्रदेश सरकार इस परियोजना में राज्य के हिस्से के लिए 10% की राशि, अर्थात 1,362.80 करोड़ रूपये का योगदान देगी। यह राज्य के विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

     भूमि अधिग्रहण

    परियोजना के लिए मध्य प्रदेश में 905.191 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जबकि महाराष्ट्र में 796.104 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। कुल मिलाकर 1,701.295 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाएगी।

    राज्य सरकार की तत्परता

     मध्यप्रदेश सरकार इस परियोजना के तहत अपने हिस्से के लिए आवश्यक धनराशि का वहन राज्य खजाने से करेगी, ताकि परियोजना समय पर और सुचारू रूप से पूरी हो सके।

    महाराष्ट्र का सहयोग

    महाराष्ट्र सरकार की ओर से इस परियोजना में किसी प्रकार का वित्तीय योगदान नहीं किया जाएगा, जिससे इस परियोजना का वित्त पोषण मुख्य रूप से केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किया जाएगा।

    प्रमुख तथ्य

    •  इस परियोजना की कुल लंबाई 309.432 किलोमीटर है, जिसमें से मध्यप्रदेश में 170.056 किलोमीटर और महाराष्ट्र में 139.376 किलोमीटर की दूरी कवर की जाएगी।

    •  भूमि अधिग्रहण और परियोजना के अन्य खर्चों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह तत्पर है।

    इंदौर-मनमाड़ नई ब्रॉड गेज लाइन परियोजना

    रेलवे बोर्ड द्वारा 31 मार्च 2016 को इंदौर से मनमाड़ तक नई ब्रॉड गेज लाइन के निर्माण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को मंजूरी दी गई थी। इस परियोजना का डीपीआर जुलाई 2017 में 8857.97 करोड़ रूपये की लागत के साथ प्रस्तुत किया गया था।

    परियोजना की लागत और फंडिंग

    •  इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना को (357.37 किमी) को पिक बुक में 9968 करोड़ रूपये की लागत के साथ शामिल किया गया है, जिसमें 50% फंडिंग कैपिटल से और 50% EBR से होगी।

    •  परियोजना का अद्यतन पूर्ण लागत 18,036.25 करोड़ रूपये है, जिसमें से मध्यप्रदेश राज्य सरकार 10% (1.362.80 करोड़ रूपये) का योगदान करेगी।

    •  इस परियोजना के हिस्से के रूप में धुले-नरडाना (50.6 किमी) को 31 जनवरी 2019 को रेलवे बोर्ड द्वारा मंजूरी दी गई और इसकी आधारशिला फरवरी 2019 में धुले में रखी गई थी।

    •  परियोजना के अद्यतन डीपीआर को 01 जनवरी 2024 को रेलवे बोर्ड में प्रस्तुत किया गया, जिसमें पूरी परियोजना की लागत 18036.25 करोड़ रूपये थी। इस परियोजना पर 08 मार्च 2024 को नीति आयोग में चर्चा की गई, जिसमें परियोजना के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखा गया।

    •  मध्यप्रदेश सरकार ने 27 अगस्त 2024 को राज्य हिस्से की लागत का 10% देने की सहमति व्यक्त की, जो 1362.80 करोड़ रूपये है। राज्य सरकार इस परियोजना में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

    source: http://www.mpinfo.org

  • Dr. Mohan Yadav: प्रत्येक ग्राम पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केंद्र की करेंगे स्थापना

    Dr. Mohan Yadav: प्रत्येक ग्राम पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केंद्र की करेंगे स्थापना

    Dr. Mohan Yadav: सिंचाई परियोजनाओं का लाभ अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में समय पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने की सहकारिता विभाग और नर्मदा नियंत्रण मंडल के कार्यों की समीक्षा

    Dr. Mohan Yadav ने कहा है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केंद्र की स्थापना की जाएगी। सोयाबीन की फसल के साथ ज्वार, बाजरा, मक्का की फसलों को भी प्रोत्साहित किया जाए। किसानों को पीएम किसान समृद्धि केंद्रों के द्वारा खाद, बीज, कृषि उपकरण, मिट्टी परीक्षण के साथ विभिन्न प्रकार की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मंत्रालय में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने 4 करोड़ 27 लाख के लाभांश का चेक भेंट किया।

    बैठक में सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री मोहम्मद सुलेमान, सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा 5 ऑइल मिल की स्वीकृति दी गई है। प्रदेश में 235 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय नवाचार प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। एक जिला-एक उत्पाद अंतर्गत नवीन सहकारी समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला सहकारी बैंको को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए योजना तैयार करें।

    मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ के कार्यों और मध्यप्रदेश राज्य विपणन संघ की विभन्न लेनदारियों के संबंध में बैठक में चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि अपेक्स बैंक में राज्य शासन द्वारा 142 करोड़ रुपए की अंशपूंजी निवेशित की है। बैंक में आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। प्रदेश की 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित कोर बैंकिग सोल्यूशन प्रणाली पर कार्यरत हैं। अपेक्स बैंक को 131.83 करोड़ का संचित लाभ हुआ है। अपेक्स बैंक द्वारा राज्य शासन को विगत 4 वर्ष में 12 करोड़ 10 लाख रुपए राशि का लाभांश दिया है। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ के द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम अच्छे ढंग से कराए जा रहे हैं। बुरहानपुर और खरगोन में शक्कर कारखाने कार्य कर रहे हैं।

    नर्मदा नियंत्रण मंडल की समीक्षा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सिंचाई परियोजनाओं का लाभ अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों को समय पर और सही ढंग से पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मंत्रालय में नर्मदा नियंत्रण मंडल की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजौरा सहित वरिष्ठ अधिकारी और सदस्यगण उपस्थित थे।

    बैठक में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के संबंध में चर्चा हुई। परियोजनाओं की निविदा एवं स्वीकृति की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों को सिंचाई परियोजनाओं से अधिक लाभ मिलेगा।

    seource:http://www.mpinfo.org

  • Dr. Mohan Yadav : लोकमाता अहिल्या देवी के सम्मान में महेश्वर में होगी मंत्रि-परिषद की बैठक

    Dr. Mohan Yadav : लोकमाता अहिल्या देवी के सम्मान में महेश्वर में होगी मंत्रि-परिषद की बैठक

    Dr. Mohan Yadav : इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन खोलेगी समृद्धि के द्वार
    केबिनेट के सदस्यों ने रेल परियोजना स्वीकृति पर मेजें थपथपाकर दी परस्पर बधाई, वृंदावन ग्राम और शहरों में गीता भवन केन्द्रों की अभिनव योजना
    रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव बन रहीं रोजगार देने का माध्यम, केबिनेट बैठक के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया संबोधित

    मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने कहा है कि लोकमाता अहिल्या देवी के 300वें जन्मोत्सव वर्ष पर लोकमाता के जन-कल्याण के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। सुशासन के साथ राष्ट्र के सांस्कृतिक गौरव की वृद्धि के लिए लोकमाता अहिल्या देवी के योगदान का आज राज्य मंत्रि-परिषद की बैठक में स्मरण किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज मंत्रि-परिषद की औपचारिक बैठक प्रारंभ होने के पहले मंत्रीगण को संबोधित करते हुए कहा कि मंत्रि-परिषद की आगामी बैठक खरगोन जिले के महेश्वर में रखी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता अहिल्या देवी के कार्यों से देशवासियों को परिचित कराने के लिए विविध आयोजन किए जाएंगे। लोकमाता अहिल्या देवी ने राजकोष के अलावा स्वयंके कोष से जन-कल्याण के कार्यों को मूर्त रूप दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होल्कर परिवार के न्यास (खासगी ट्रस्ट) की व्यवस्था द्वारा पति की ओर से पत्नी को आय का 25 प्रतिशत अंश प्रदान करने की परम्परा की जानकारी भी दी। लोकमाता अहिल्या देवी ने निजी राशि से देश के अनेक स्थानों में मंदिरों के निर्माण और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के कार्य किए। मध्यप्रदेश सरकार ने 14 सदस्यीय समिति गठित की है, जो अहिल्या देवी की जन-कल्याण की भावना के साथ आत्म-निर्भर बनाने के उनके प्रयत्नों को व्यवहार में परिणित करने के संबंध में विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन का निर्णय करेगी। संस्कृति विभाग और अन्य विभागों की भागीदारी से सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

    रेल परियोजना की स्वीकृति एक बड़ी उपलब्धि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को बताया कि मध्यप्रदेश के मालवा और निमाड़ अंचल के साथ ही अन्य क्षेत्रों की प्रगति के लिए दशकों से लंबित इंदौर-मनमाड ब्राडगेज डबल लाइन की स्वीकृति केन्द्रीय केबिनेट द्वारा दी गई है। मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बधाई दी और प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं रेल मंत्री श्री वैष्णव का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को इस रेल परियोजना की स्वीकृति के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह 18036 करोड़ रूपये लागत की रेल परियोजना प्रदेश के लिए नई लाइफ लाइन होगी। इकॉनामिक कॉरीडोर का विकास होगा। प्रदेश के बड़वानी, धार, खंडवा, खरगोन, इंदौर सहित निकटवर्ती जिले लाभान्वित होंगे। यहाँ 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से रेलें दौड़ेंगी। पूरे प्रदेश के जिले लाभान्वित होंगे, जिनमें ग्वालियर से सीधे जवाहर लाल नेहरू पोर्ट (बंदरगाह) तक जाने की कनेक्टिविटी कम दूरी के साथ प्राप्त होगी। अनेक जनजातीय बहुल जिलों सहित राजगढ़ जैसे आकांक्षी जिले भी इससे लाभान्वित होंगे। यह परियोजना मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी वर्चुअली शामिल होते हुए रेल परियोजना की मंजूरी पर हर्ष व्यक्त किया।

    वृंदावन ग्रामों का विकास होगा, शहरों में प्रारंभ होंगे गीता भवन केन्द्र

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जानकारी दी कि प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में एक वृंदावन गांव विकसित किया जाएगा। यह गांव स्वावलंबी एवं स्वच्छ और निर्मल होंगे। इनमें सामुदायिक भवन, सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं होंगी। वनांचल में वनोपज संग्रहण केन्द्र भी होंगे। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोतों के उपयोग से ग्राम नए स्वरूप में सामने आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन प्रारंभ किए जाएंगे, जो वैचारिक अध्ययन केन्द्र भी होंगे। यहाँ पठन-पाठन की व्यवस्था होगी। भारतीय संस्कृति से अवगत करवाने वाली पुस्तकों का संग्रह होगा और विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से साहित्य उपलब्ध करवाया जाएगा। नगरीय विकास और आवास विभाग इस अभिनव योजना की रूपरेखा तैयार करेगा, इसके बाद गतिविधियां प्रारंभ होंगी।

    रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से रोजगार के बढ़ रहे अवसर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उत्पन्न कर रही है। हाल ही में 28 अगस्त को ग्वालियर में सम्पन्न कॉन्क्लेव में 15 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों सहित 4 हजार से अधिक प्रतिनिधि और निवेशक शामिल हुए। लगभग 400 बॉयर-सेलर मीट हुईं। करीब 8 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनके फलस्वरूप 35 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। आगामी 27 सितम्बर को सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की तैयारियां की जा रही हैं। अक्टूबर माह में रीवा में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की जाएगी।

    source: http://www.mpinfo.org


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