Tag: मध्य प्रदेश सरकार

  • CM Dr. Yadav: खनिज कॉन्क्लेव में 20 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए

    CM Dr. Yadav दो दिवसीय माईनिंग कॉन्क्लेव के समापन सत्र में हुए शामिल

    • प्रदेश में खनिज क्षेत्र में निवेश को पूर्ण प्रोत्साहन
    • 11 औद्योगिक संस्थान निवेश के लिये आगे आये
    • हीरे के बाद अब सोना भी निकालेगा मध्यप्रदेश
    • अयोध्या में रामलला के मंदिर में उपयोग में लाए गए मध्यप्रदेश के मंडला के पत्थर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। इस संपदा के दोहन के लिए प्रयास बढ़ाते हुए खनिज क्षेत्र में नए निवेश को पूरा प्रोत्साहन दिया जाएगा। खनन क्षेत्र के उद्यमियों को राज्य सरकार सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी। प्रदेश की खनिज संपदा का दोहन करते हुए उत्पाद भी प्रदेश में ही हो, ऐसे प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को 2 दिवसीय माईनिंग कॉन्क्लेव के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सम्पन्न कॉन्क्लेव में विभिन्न 11 औद्योगिक संस्थानों की ओर से 19,650 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओआईएल (भारत सरकार का उपक्रम) और मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम लिमिटेड के मध्य खनिज ब्लॉक से संबंधित “संयुक्त उद्यम समझौता” हस्ताक्षरित भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कॉन्क्लेव को सफल आयोजन बताते हुए कहा कि प्रदेश के खनिज राजस्व में भी 5 गुना वृद्धि का लक्ष्य आने वाले समय में प्राप्त किया जाएगा। उद्यमियों के साथ भू-गर्भ शास्त्री, वैज्ञानिक, खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, भारत सरकार के खनिज मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी कॉन्क्लेव में शामिल हुए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति विश्व में सबसे अलग है। जहां अन्य देश राष्ट्र को पिता मानते हैं, हमारे देश में हम भारत माता की जय का उद्घोष करते हैं। मातृ प्रधान व्यवस्था को प्राचीन काल से प्रश्रय मिला। हम देश को भी मातृ संस्था मानते हैं। शरीर की रचना भी ब्रम्हांड की तरह होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहाकि इस वसुंधरा की नदियां मनुष्य के रक्त प्रवाह के समान हैं। पृथ्वी में भी प्राण होते हैं और वनस्पति में भी प्राण होते हैं, यह हमारी मान्यता अन्य देशों से काफी पुरानी हैं। प्रकृति के दोहन और शोषण के अंतर को समझने की आवश्यकता है। खनिज संपदा की दृष्ट से ईश्वर की कृपा मध्यप्रदेश पर है।

    माईनिंग कॉन्क्लेव में प्रमुख निवेश प्रस्ताव

    क्र

    फर्म/कम्पनी का नाम

    प्रोजेक्ट का विवरण

    स्थान

    1

    ल्यूगांग इंडिया, नई दिल्ली

    प्रदेश में माइनिंग उपकरण निर्माण इकाई स्थापना निवेश राशि 250 करोड़

    2

    इंडियन रेयर अर्थस, मुंबई

    रेयर मेटल्स क्लस्टर की स्थापना

    औद्योगिक क्षेत्र अचारपुर, जिला भोपाल

    3

    द कमोडिटी हब, गुरूग्राम हरियाणा

    कॉपर, रॉकफास्फेट तथा सिलीकॉन बेनीफिकेशन प्लांट की स्थापना, निवेश राशि 2000 करोड़

    बालाघाट एवं खरगौन

    4

    श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, रायपुर छत्तीसगढ़

    इंट्रीगेटेड स्टील प्लांट,-निवेश राशि 1000 करोड़

    उमरिया

    5

    व्रिज आयरन एवं स्टील लिमि. जल विहार कालोनी रायपुर

    इंट्रीगेटेड स्टील प्लांट,-निवेश राशि 1000 करोड़

    कोतमा शहडोल

    6

    बैर्री अलायज, कोलकाता

    प्रदेश में फेरो अलायज इकाई की स्थापना निवेश राशि 400 करोड़

    7

    इन्विनायर पेट्रोडाइन लिमिटेड

    कोल बेड मीथेन और कोल गैसीफिकेशन में निवेश राशि 5000 करोड़

    बैतूल और छिंदवाड़ा

    8

    डालमिया सीमेंट, नई दिल्ली

    प्रदेश में सीमेंट प्लांट की स्थापना निवेश राशि 3000 करोड़

    सतना

    9

    जे.के. सीमेंट

    पन्ना जिले में स्थापित सीमेंट प्लांट का विस्तारीकरण निवेश राशि 2500 करोड़

    पन्ना

    सिंगरौली एवं शहडोल जिले में आवंटित कोल ब्लॉक निवेश राशि 1000 करोड़

    सिंगरौली एवं शहडोल

    10

    अंबुजा सीमेंट अहमदाबाद, गुजरात

    प्रदेश में सीमेंट प्लांट की स्थापना निवेश राशि 3000 करोड़

    रीवा

    11

    सागर स्टोन इंडस्ट्रीज, जबलपुर

    फोस्फोराईट से खाद विनिर्माण इकाई की स्थापना, निवेश राशि 500 करोड़

    छतरपुर

     

    कुल

    19650

    प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में जेट की गति से बढ़ रहा देश

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश जेट की गति से आगे बढ़ रहा है। खनिज के क्षेत्र में प्रधानमंत्री की कल्पना के अनुसार भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश भी विकास के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। जहां कृषि के साथ ही पशुपालन और अन्य क्षेत्रों में नए प्रकल्प आ रहे हैं, वहीं खनिज क्षेत्र में मध्यप्रदेश उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित करेगा। भारत सरकार द्वारा खनिजों की नीलामी में पुरस्कृत मध्यप्रदेश विविध प्रकार की खनिज संपदा के समुचित दोहन के लिए संकल्पबद्ध है। मध्यप्रदेश सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को भरपूर प्रोत्साहन देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनन क्षेत्र में उद्यमियों को सरकार का पूरा साथ मिलेगा। खनिज क्षेत्र मध्यप्रदेश को प्रगति के नए आयामों को छूने में सहयोगी बनेगा।

    हर महीने रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में हर महीने अलग-अलग क्षेत्रों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो रही हैं। इस वर्ष अब तक हुई 4 कॉन्क्लेव के फलस्वरूप लगभग 2 लाख 50 हजार करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। आने वाली 23 अक्टूबर को रीवा में “रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव” उद्योग के विभिन्न सेक्टर्स में नए निवेश लाने में सहयोगी होगी।

    एक ही दिन में दो बड़े आयोजनों में भागीदारी का सौभाग्य

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक प्रगति को अग्रसर रखने एवं युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिये रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव की जा रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश की पूरी क्षमता को विकसित करने हमने पर्यटन की भी कॉन्क्लेव की। आज मैं दो कॉन्क्लेव में शामिल हुआ। सुबह पेट्रोकेमिकल एवं फार्मा इंडिया केम मुंबई में शामिल हुआ और अभी माइनिंग कॉन्क्लेव में शामिल हुआ हूँ। विभागवार कॉन्क्लेव की श्रंखला जारी रहेगी। अगले वर्ष फरवरी में जीआईएस का आयोजन करेंगे। मध्यप्रदेश में चहुँमुंखी औद्योगिक विकास और रोजगार बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगे।

    अयोध्या के राम मंदिर तक पहुंचा मध्यप्रदेश का पत्थर, हीरे के बाद सोना भी निकालेंगे

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निश्चित ही यह गर्व का विषय है कि गोंडवाना अंचल के मंडला जिले में खनन से प्राप्त पत्थर का उपयोग अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर के गर्भ गृह में लगाने का सौभाग्य मध्यप्रदेश को मिला। निश्चित ही यह पत्थर गुणवत्ता की दृष्टि से इस योग्य पाया गया कि उसे गर्भगृह में स्थान मिला। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को श्री अनुपम चतुर्वेदी और श्री किशोर ने इस पत्थर का नमूना भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निश्चित ही मध्यप्रदेश खनिजों के मामले में भी अद्वितीय है। भारत की वसुंधरा में मध्यप्रदेश हृदय प्रदेश होने के साथ रत्न-गर्भा भी है। पन्ना में हीरों का भंडार प्रदेश को अलग पहचान देता है। अब हीरों के साथ सोना भी प्रदेश की धरती से निकलेगा। अन्य खनिजों के खनन के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनन तकनीक में प्रयुक्त हो रहे नवीनतम उपकरणों की भी जानकारी ली। नई खनन मशीन के लोकार्पण के साथ ही खनन उपकरणों की कार्य प्रणाली की भी जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी स्थल पर एनसीएल नॉर्दन कोल-फील्ड्स लिमिटेड, नवाधर सोल्यूशन्स, मार्गसॉफ्ट टेक्नोलॉजिस, बालाजी सोल्यूशन्स, प्रोपल इंडस्ट्रीज, दौलतराम इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील लिमिटेड, टेरेक्स इंडिया प्रायवेट लिमिटेड, ऐरो लिमिटेड, रेलटेल कॉर्पोरेशन, फॉर्च्यून स्टोन्स लिमिटेड, महेश्वर माईनिंग लिमिटेड, इंजीयिटेक कंसलटेंट, रामनिक पॉवर एंड एलॉयस प्रायवेट लिमिटेड, कार्तिकेय एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग सर्विसेज प्रायवेट लिमिटेड के स्टॉल के साथ ही जीएसआई और मध्यप्रदेश के खनिज संसाधन विभाग के स्टॉल भी देखे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के खनन क्षेत्र पर केंद्रित लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत सरकार के खनिज मंत्रालय द्वारा प्रकाशित पुस्तिका “खनन क्षेत्र में सुधार” (माईनिंग सेक्टर रिफार्म्स) का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से एमओआईएल (मॉयल) कम्पनी के सीएमडी द्वारा दो करोड़ 78 लाख 94 हजार 725 रूपए का लाभांश चेक भेंट किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से माईनिंग कॉन्क्लेव के प्रतिनिधियों और निवेशकों ने की भेंट

    कॉन्क्लेव के समापन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सागर स्टोन इंडस्ट्रीज के श्री नितिन शर्मा, कैप्टन स्टील के श्री बैरी अलॉयज, मैंगनीज ओर इंडिया लिमिटेड (एमओआईएल) श्री अजीत कुमार सक्सेना, इंडियन रेयर अर्थस मुंबई के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दीपेन्द्र सिंह ने भेंट कर मध्यप्रदेश में निवेश के प्रस्तावों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज क्षेत्र के उद्यमियों से वन-टू-वन बातचीत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार निवेश के प्रति गंभीर ही नहीं, संवेदनशील और प्रतिबद्ध भी है। सभी तरह के उद्योगों के लिए बुनियादी सुविधाएं एवं अन्य आवश्यक रियायतें प्रदान की जा रही हैं। इस नाते खनिज क्षेत्र को भी पूर्ण सहयोग दिया जाएगा।

    मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि अगले 25-30 वर्षों तक विश्व में भारत का दबदबा रहेगा। विश्व में भारत को एक ब्राइट स्पॉट की तरह देखा जा रहा है। भारत स्टार्ट-अप के क्षेत्र में बहुत बड़ी ताकत बन चुका है। यूएसए और चीन के बाद स्टार्ट-अप के क्षेत्र में भारत तीसरा बड़ा देश है, जबकि यूनीकॉर्न के क्षेत्र में दूसरी बड़ी शक्ति है। पीएम गति शक्ति पोर्टल पर कई विभागों के डेटा को डिजिटाईज कर डाला गया है। इससे कई कार्य कम समय में आसानी से किये जा सकते हैं। अगले 25 सालों में देश की इकोनॉमी 30 ट्रीलियन की होगी तथा देश की जनसंख्या 163 करोड़ होगी। प्रति व्यक्ति आय 18 से 19 हजार डॉलर होगी। मध्यप्रदेश देश का तेजी से विकसित होता राज्य है। प्रदेश मिनरल रिसोर्सेस में तो नम्बर वन है ही, यहां पानी, कोयला एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों की भी प्रचुरता है। प्रदेश में वर्ष 2008 में सिंचित भूमि 7 लाख हेक्टेयर थी, जो बढ़कर वर्तमान में 45 लाख हेक्टेयर हो गई है। प्रदेश तेजी से औद्योगिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आरआईसी और जीआईएस का आयोजन किया जा रहा है। माईनिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिये भी माईनिंग कॉन्क्लेव जैसे कई नवाचार किये जा रहे है।

    श्री अंशु पाण्डे, संचालक, भारत सरकार, खान मंत्रालय ने बताया कि भारत में सामरिक एवं क्रिटिकल खनिज की उपलब्धता विदेशों से आयात पर निर्भर है। भारत सरकार द्वारा सामरिक एवं क्रिटिकल खनिज के लिये अधिनियम एवं नियमों में प्रावधान किये गये हैं।

    एरिओ कम्पनी के जीएम श्री पीयूष राणा ने “डीमिस्टीफाइंग फ्यूचरिस्टिक माइनिंग-द गेम चेंजिंग इम्पेक्ट ऑफ एआई एण्ड ड्रोन्स” विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि ड्रोन टेक्नालॉजी को अपना कर माइनिंग सेक्टर में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है। इससे बहुत कम समय में बहुत बड़े स्तर पर निरीक्षण, परीक्षण एवं मेजरमेंट सहित अन्य कई कार्य किये जा सकते हैं। केन्द्र सरकार ने सुरक्षा, दक्षता एवं विकास को ध्यान में रखते हुए ड्रोन रूल्स-2021 बनाये हैं। भारत का सबसे बड़ा ड्रोन आधारित डिजिटल प्रोजेक्ट डिजीकोल लांच किया गया है। इस तकनीक से एक्यूरेसी एवं एसेसिबिलीटी के साथ एफिशिएंटली प्रोजेक्ट पूरे किये जा सकते हैं। देश की कई बड़ी कम्पनीज जैसे अडानी, टाटा स्टील, वेदांता, जेएसडब्ल्यू, आदित्य बिड़ला ग्रुप जैसी कई बड़ी कम्पनी इस तकनीक का प्रयोग कर रही हैं।

    डिलाइट के डायरेक्टर श्री तुषार चक्रवर्ती ने “डिजिटाइजेशन इन माइनिंग सेक्टर’’ विषय पर प्रेजेंटेशन दिया। श्री चक्रवर्ती ने बताया कि डिजिटाइजेशन को अपना कर कई चुनौतियों को आसान किया जा सकता है। इससे सुरक्षा, उत्पादन एवं क्षमता को बढ़ाया जा सकता है तथा लागत और जोखिम को कम किया जा सकता है।

    रेलटेल के श्री रवीन्द्र सालुंखे ने ई-चेकगेट, एआई पॉवर्ड, स्मार्ट एन्फोर्समेंट सिस्टम के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई पॉवर्ड, चेकगेट तकनीक से वाहन का प्रकार, वाहन की नम्बर प्लेट का ऑटोमेटिक रिकग्नीशन, वाहन में मिनरल की मात्रा, मिनरल का प्रकार आदि की एआई द्वारा पहचान आसानी से की जा सकती है। ई-चेकगेट व्यवस्था के माध्यम से मॉनीटरिंग और डिटेक्शन की सटीक व्यवस्था लागू की जा सकती है।

    फीमी के वाइस चेयरमेन श्री हर्ष त्रिवेदी ने कहा कि माइनिंग सेक्टर पिछड़े इलाकों में रोजगार दिला रहा है, जिससे संबंधित क्षेत्र का विकास हो रहा है, कई लाख लोग इस सेक्टर में रोजगार पाकर जीविकोपार्जन कर रहे हैं। माइनिंग सेक्टर की देश की जीडीपी में 3 प्रतिशत की भागीदारी है। माइनिंग कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश में माइनिंग सेक्टर में निवेश बढ़ेगा। यह कॉन्क्लेव माइनिंग सेक्टर के विकास में अहम साबित होगी।

    अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने वन क्षेत्र में खनिजों के सर्वेक्षण तथा खनिज पट्टे के लिये वन विभाग की पूर्वानुमति लिये जाने के नियमों और प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही वन अनुमति प्राप्त करने के लिये औपचारिकताओं की जानकारी दी। प्रमुख सचिव खनिज साधन श्री संजय कुमार शुक्ला ने प्रदेश में खनिज की उपलब्धता, उत्पादन एवं खनिज आधारित उद्यो ग की संभावना के संबंध में बताया। उनके द्वारा यह भी अवगत कराया गया है कि देश के सी.बी.एम. के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत मध्यप्रदेश कर रहा है। प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री गुलशन बामरा ने बताया कि पर्यावरण संतुलन के साथ खनिजों का खनन आवश्यक है। उन्होंने इसके संबंध में लागू नियमों एवं कानूनों के संबंध में व्याख्यान दिया। सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम डॉ. नवनीत मोहन कोठारी के द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यियम उद्यो्ग एवं स्टॉटप में अवसरों के बारे अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इसके लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिससे अधिक संख्या में उद्योग स्थापित हो सके। अपर सचिव राजस्व श्री संजय कुमार द्वारा राजस्व के संबंध में अवगत कराया गया है कि प्रदेश में लागू भू-राजस्व संहिता में खनन के संबंध में क्या-क्या प्रावधान हैं। वन अनुमति हेतु क्षतिपूर्ति वनारोपण के लिये भूमि का बैंक तैयार किया गया है जिसे सत्यापन के लिये वन विभाग को दिया गया है। वन विभाग के सत्यापन उपरांत यह भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी।

    source: http://www.mpinfo.org

  • CM Dr. Yadav और केन्द्रीय मंत्री श्री गड़करी करेंगे दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ

    CM Dr. Yadav और केन्द्रीय मंत्री श्री गड़करी करेंगे दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ

    CM Dr. Yadav: सड़क और पुल निर्माण में नवीनतम तकनीकों पर होगा विचार-विमर्श

    • भारतीय सड़क कांग्रेस और लोक निर्माण विभाग के सहयोग से शिविर का आयोजन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गड़करी शनिवार को रवीन्द्र भवन भोपाल में “सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में उभरती नवीनतम प्रवृत्तियों और तकनीकों’’ पर दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ करेंगे। सेमिनार में सड़क और पुल निर्माण की नवीनतम तकनीकों, सामग्रियों और अनुबंध निष्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। सेमिनार का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस और मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग के सहयोग से हो रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस दो दिवसीय सेमिनार से मध्यप्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। सेमिनार में विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे।

    सेमिनार में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। सेमिनार के पहले दिन 19 अक्टूबर को प्रमुख चर्चाओं में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग, और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा।

    दूसरे दिन 20 अक्टूबर को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे।

    सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को बढ़ाने और नवीनतम तकनीकों से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश की अवसंरचना परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिल सकेगी।

    source: http://www.mpinfo.org

  • CM Dr. Yadav: राज्य सरकार बनाने जा रही है आकर्षक फार्मा पॉलिसी

    CM Dr. Yadav: राज्य सरकार बनाने जा रही है आकर्षक फार्मा पॉलिसी

    CM Dr. Yadav: मध्यप्रदेश 160 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है दवाएं

    • वर्ष 2023-24 में प्रदेश से 11 हजार 889 करोड़ रुपये के फार्मा प्रोड्क्ट का हुआ एक्सपोर्ट
    • पेट्रो-केमिकल इकाइयों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने प्रदेश में की जा रही है पहल
    • प्रदेश में केमिकल-फार्मा-पेट्रो-केमिकल और प्लास्टिक जैसे उद्योगों के लिए है बेहतरीन इकोसिस्टम
    • भारत पेट्रोलियम की 50 हजार करोड़ और गैल की 35 हजार करोड़ लागत की पेट्रो-केमिकल परियोजनाओं का कार्य जारी
    • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में इंडिया केम- 2024 के 13वें संस्करण को किया संबोधित

    CM Dr. Yadav ने कहा है कि मध्यप्रदेश में केमिकल, फार्मा, पेट्रो-केमिकल और प्लास्टिक जैसे उद्योगों के लिए बेहतरीन इको-सिस्टम विद्यमान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बीना में भारत पेट्रोलियम की 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की पेट्रो-केमिकल परियोजना का भू्मि-पूजन किया गया, जिसका कार्य आरंभ हो गया है। प्रदेश में 35 हजार करोड़ की गेल इंडिया की वृहद पेट्रो-केमिकल परियोजना का काम तेजी से जारी है, इससे 25 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। प्रदेश में केमिकल और पेट्रो-केमिकल क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां कार्यरत हैं। प्रदेश में 275 फार्मा यूनिट्स स्थापित हैं, जिनसे 160 से अधिक देशों को दवाएं निर्यात हो रही हैं। दवा निर्यात में मध्यप्रदेश का देश में चौथा स्थान है। वर्ष 2023-24 में 11 हजार 889 करोड़ रुपये के फार्मा प्रोड्क्ट का एक्सपोर्ट हुआ है। इस क्षेत्र में और अधिक निवेश आकर्षित करने तथा गतिविधियों को विस्तार देने के लिए राज्य सरकार आकर्षक फार्मा पॉलिसी बनाने जा रही है। हम एक फ्यूचर रेडी स्टेट हैं, रसायन और उर्वरक के क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयास, आने वाले समय में विकास की नई कहानी लिखने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुंबई में इंडिया केम- 2024 के 13वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे।

    केमिकल एंड पेट्रो-केमिकल स्ट्रेटजीज पर “नॉलेज पेपर” का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन व उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ “इंडिया केम-2024 एडवांटेज भारत : इंडियन केमिकल्स एंड पेट्रो-केमिकल्स पेविंग द फ्यूचर” के 13वें द्वि-वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण एवं रसायन-उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र रजनीकांत पटेल, ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी सहित फिक्की के पदाधिकारी और विभिन्न उद्योग समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कैटालाइजिंग इंडिया ऑन केमिकल एंड पेट्रो-केमिकल स्ट्रेटजीज फॉर ग्लोबल इंटीग्रेशन एंड ग्रोथ विषय पर फिक्की और अर्नेस्ट एंड यंग द्वारा तैयार “नॉलेज पेपर” के विमोचन में शामिल हुए।

    मध्यप्रदेश, औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयासरत

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश प्रगति पथ पर निरंतर अग्रसर है। भारत विश्व की 11वीं अर्थव्यवस्था से बढ़कर 5वें पायदान पर आया है। मध्यप्रदेश, औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में वर्तमान में 250 फार्मेसी और 35 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। केमिकल पेट्रो-केमिकल उद्योग के लिए प्रदेश में आवश्यक अधोसंरचना तैयार है। रायसेन जिले के तामोट, ग्वालियर के बिलोवा में प्लास्टिक पार्क तथा रतलाम में वृहद फार्मा बायोटेक केमिकल जोन का विकास हो रहा है। झाबुआ में मेघनगर के औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल उद्योग के लिए आधुनिक अधोसंरचना, धार के पास बदनावर में पीएम मित्रा पार्क और भोपाल तथा ग्वालियर में केंद्रीय पेट्रो रसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान सीपेट की शाखाएं स्थापित की गई हैं।

    रीजनल इंड्रस्ट्री कॉन्क्लेव में उद्योग समूहों ने निवेश के लिए की पहल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिकीकरण तथा निवेश के क्षेत्र में केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन आरंभ किया गया है। अब तक उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो चुकी हैं। अगली इंडस्ट्री कॉन्क्लेव शीघ्र ही रीवा में होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सभी प्रकार के उद्योगों के लिए संभावनाएं विद्यमान हैं। उद्योग समूहों तथा निवेशकों को इससे अवगत कराने और राज्य सरकार की नीतियों के बारे में बताने के उद्देश्य से मुम्बई सहित कोयंबटूर, बैंगलुरू और कोलकाता में रोड-शो किए गए हैं। प्रदेश में निवेश के लिए कई उद्योग समूहों ने पहल की है।

    रतलाम, झाबुआ और इन्दौर में फार्मा क्षेत्र की गतिविधियों के विस्तार के कार्य जारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेट्रो-केमिकल क्षेत्र में मध्यप्रदेश प्रगति करेगा। राज्य सरकार “स्टेट ऑफ दी आर्ट पेट्रो-केमिकल इन्वेस्टमेंट रीजन” बनाने की योजना पर भी कार्य कर रही हैं। सीहोर-आष्टा एक प्रकार से देश का मध्य क्षेत्र है जहां विमानतल और रेल लाइन सहित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं विद्वमान हैं। रतलाम, झाबुआ और इन्दौर में भी फार्मा क्षेत्र में गतिविधियों के विस्तार के लिए कार्य किया जा रहा है।

    केन्द्रीय मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने इंडिया केम – 2024 में किया मध्यप्रदेश का उल्लेख

    केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने प्रदेश के बीना की भारत पेट्रोलियम पेट्रो-केमिकल परियोजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पेट्रो-केमिकल, फार्मा, रसायन और उर्वरक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों से निवेश और रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। कार्यक्रम को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन-उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र रजनीकांत पटेल और ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने भी संबोधित किया। फिक्की के पदाधिकारियों और विभिन्न उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों ने भी इंडिया केम-2024 में अपने विचार रखे।

    source: http://www.mpinfo.org

  • कृषि मंत्री Edal Kanshana ने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है

    कृषि मंत्री Edal Kanshana ने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है

    कृषि मंत्री Edal Kanshana श्यामला हिल्स स्थित निवास पर मीडिया से चर्चा में यह बातें कही।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकार ने खरीफ में किसानों को आवश्‍यक मात्रा में उर्वरक उपलब्‍ध कराया है और रबी में भी इसी प्रकार से किसानों की आवश्‍यकतानुसार उर्वरक उपलब्‍ध करायेगें। मंत्री श्री कंषाना श्यामला हिल्स स्थित निवास पर मीडिया से चर्चा में यह बातें कही।

  • कृषि विकास मंत्री Edal Kanshana: किसानों को व्यवस्थित तरीके से हो खाद का वितरण

    कृषि विकास मंत्री Edal Kanshana: किसानों को व्यवस्थित तरीके से हो खाद का वितरण

    कृषि विकास मंत्री Edal Kanshana ने कहा कि प्रदेश में कहीं भी खाद की कालाबाजारी नहीं हो।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री Edal Kanshana ने कहा है कि प्रदेश में कहीं भी किसानों को खाद की समस्या उत्पन्न न हो। किसानों को व्यवस्थित तरीके से खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाये। मंत्री श्री कंषाना श्यामला हिल्स स्थित निवास पर प्रबंध संचालक मार्कफेड श्री आलोक कुमार सिंह, संचालक कृषि श्री अजय गुप्ता एवं अन्य अधिकारियों के साथ प्रदेश में खाद वितरण की व्यवस्था पर चर्चा कर रहे थे।
  • CM Dr. Yadav: सिंहस्थ के वैश्विक आयोजन के लिये अभी से करें तैयारियाँ

    CM Dr. Yadav: सिंहस्थ के वैश्विक आयोजन के लिये अभी से करें तैयारियाँ

    CM Dr. Yadav: सिंहस्थ-2028 के 19 कार्यों के लिये 5 हजार 882 करोड़ रूपये की मंजूरी

    • मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्री-मंडलीय समिति ने दी मंजूरी

    CM Dr. Yadav ने कहा है कि सनातन धर्म की सभी सन्यासी परम्पराओं के सभी वैष्णव और शैव संत 12 साल में सिंहस्थ में आते हैं और भविष्य में सनातन धर्म की दिशा, आचरण, स्वरूप तय करते है। मानवता की स्थापना के लिये सर्वोच्च सिंहस्थ मेला-2028 में पुन: होने वाला है। सिंहस्थ की तैयारियाँ अभी से प्रारंभ की जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक आयोजन सिंहस्थ के माध्यम से भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा। इसकी समुचित तैयारियां की जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल ज्योर्तिलिंग उज्जैन के महाकाल लोक और दूसरे ज्योर्तिलिंग ओंकारेश्वर में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। मध्यप्रदेश की पहचान धार्मिक नगरी उज्जयिनी में हर 12 वर्ष में होने वाले सिंहस्थ के रूप में होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दृष्टि से सिंहस्थ प्रदेश के साथ ही राष्ट्र के लिये एक महत्वपूर्ण आयोजन है। पूरे विश्व में इसकी गूंज होती है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अधिक से अधिक सुविधाएँ देने के लिए नये निर्माण कार्य भी कराये जा रहे हैं। साथ ही वर्तमान सुविधाओं को उन्नयन भी किया जा रहा है। सिंहस्थ की सफलता के लिये अभी से तैयारियाँ शुरू करनी होगी इन सभी कार्यों को शासकीय विभाग और अन्य उपक्रम तालमेल के साथ पूर्ण करने के लिये जुटना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी योजना तैयार की जाये कि क्षिप्रा नदी हर हाल में पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त हो और क्षिप्रा नदी में निरंतर शुद्ध जल का अविरल प्रवाह हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-महाकुंभ में दुनिया भर से करीब 15 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस वजह से उज्जैन में ट्रैफिक व्यवस्था बनाये रखना बड़ी चुनौतीपूर्ण होगा।

    सिंहस्थ-2028 के 19 कार्यों के लिये 5 हजार 882 करोड़ रूपये की मंजूरी दी गई है। यह मंजूरी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्री-मंडलीय की पहली बैठक में दी गई। बैठक में जल संसाधन, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ऊर्जा, लोक निर्माण, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के कार्यों को मंजूरी दी गई है।

    मंत्री-मंडलीय समिति ने जिन कार्यों को स्वीकृति दी है। उनमें 778 करोड़ 91 लाख रूपये के 29.21 किलोमीटर घाट निर्माण, 1024 करोड़ 95 लाख रूपये का 30.15 किलोमीटर कान्ह नदी का डायवर्सन, 614 करोड़ 53 लाख रूपये के सिंहस्थ के लिये क्षिप्रा नदी में जल निरंतर प्रवाह योजना (सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बांध) का निर्माण, 74 करोड़ 67 लाख रूपये के क्षिप्रा नदी पर प्रस्तावित 14 बैराजों का निर्माण, 43 करोड़ 51 लाख रूपये के कान्ह नदी पर प्रस्तावित 11 बैराजों का निर्माण, 198 करोड़ रूपये से उज्जैन शहर की सीवरेज परियोजना, 250 करोड़ रूपये से अति. उच्च दाब से संबंधित कार्य के नवीन ईएचवी उपकेन्द्र का निर्माण, 16 करोड़ 80 लाख रूपये से अति. उच्चदाब केन्द्र क्षमतावृद्धि का निर्माण, 29 करोड़ 83 लाख रूपये का नवीन 33/11 के.व्ही. का निर्माण, 4 करोड़ 50 लाख रूपये से 33 के.व्ही. लाईन एवं इन्टर कनेक्शन एवं नवीन उपकेन्द्र से संबंधित कार्य (10 किलोमीटर), 18 करोड़ 36 लाख रूपये से के.व्ही. लाईन एवं इन्टर कनेक्शन एवं नवीन उपकेन्द्र से संबंधित (80 किलोमीटर) का निर्माण और 10 करोड़ 8 लाख रूपये का भूमिगत केबल कार्य (औंकारेश्वर बजट) का निर्माण शामिल है।

    इसी तरह 18 करोड़ रूपये का शंकराचार्य चौराहा से दत्त अखाड़ा, भूखीमाता, उजड़खेड़ा हनुमान से उज्जैन बड़नगर मार्ग का निर्माण, 18 करोड़ रूपये का खाक-चौक, वीर सावरकर चौराहा, गढ़कालिका, भर्तहरीगुफा से रंजीत हनुमान तक मार्ग एवं क्षिप्रा नदी पर पुल का निर्माण, 40 करोड़ रूपये से सिद्धवरकूट से कैलाश खोह तक सस्पेंशन ब्रिज पहुँच मार्ग प्रोटेक्शन कार्य सहित (ओंकारेश्वर में कावेरी नदी पर पैदल पुल सहित ओंकारेश्वर घाट से सिद्धवरकूट तक पहुँच मार्ग का निर्माण), 1692 करोड़ रूपये से इंदौर उज्जैन विद्यमान 4 लेन मार्ग का 6 लेन मय पेव्हड शोल्डर मे हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल अंतर्गत उन्नयन एवं निर्माण, 950 करोड़ रूपये से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड 4 लेन परियोजना का हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर निर्माण कार्य, 75 करोड़ रूपये से महाकाल लोक कॉरीडोर में स्थित फाइबर की प्रतिमाओं के स्थान पर पाषाण प्रतिमाओं का निर्माण, स्थापना एवं आवश्यक विकास कार्य और कुम्भ संग्रहालय, काल गणना शोध केन्द्र उज्जैन का अनुरक्षण एवं विकास कार्य शामिल है।

    सिंहस्थ के लिये 568 कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त

    अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन एवं आवास श्री नीरज मंडलोई ने बताया कि अभी तक सिंहस्थ-2028 के लिये 18 विभागों के 568 कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए है। जिनकी अनुमानित लागत 15 हजार 567 करोड़ रूपये है। इन कार्यों में विभागीय, सिंहस्थ मद और बीओटी आदि के कार्य शामिल है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने जानकारी दी कि इंदौर में लव-कुश चौराहे से उज्जैन तक नवीन मेट्रो लाईन बिछाये जाने का सर्वेक्षण कार्य दिल्ली रेल मेट्रो कार्पोरेशन को सौंपा गया है।

    source: http://www.mpinfo.org

  • governor Mangubhai Patel: प्रतियोगिता में भाग लेने से मिलता है नया जोश और मनोबल 

    governor Mangubhai Patel: प्रतियोगिता में भाग लेने से मिलता है नया जोश और मनोबल 

    governor Mangubhai Patel केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय अखिल भारतीय स्पर्धा के शुभारम्भ कार्यक्रम में शामिल हुए

    • अनुभवों से उन्नत होता प्रतिभागी का कौशल

    राज्यपाल Mangubhai Patel ने कहा है कि प्रतियोगिता में भाग लेने से नया जोश और मनोबल तो मिलता ही है, साथ ही अपने और दूसरों के प्रदर्शन के अनुभव से कौशल का नया स्तर प्राप्त होता है। प्रतियोगिता में ज्ञान और कौशल के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि हार-जीत से कही अधिक महत्वपूर्ण हमारी संस्कृति, सुसंस्कृत जीवनशैली की गरिमा और गौरव का सम्मान है।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल आज केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में आयोजित अखिल भारतीय क्रीड़ा, सांस्कृतिक, शैक्षिक स्पर्धा, युवा महोत्सव 2024 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विशिष्ट ग्रंथों, “सर्वसमावेशी शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में महर्षि दयानन्द सरस्वती” और “भारतीय ज्ञान परम्परा शिक्षक शिक्षा” का लोकार्पण किया। महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मिथिला प्रसाद त्रिपाठी, युव संसद जयपुर के संस्थापक श्री आशुतोष जोशी मंचासीन थे।    

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि आधुनिक मानव जीवन से जुड़े क्षेत्रों शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी जीवन आदि कई विषयों में संस्कृत ज्ञान निधि की प्रासंगिकता आज बढ़ रही है।दुनिया में संस्कृत भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे प्रमुख ज़रिया है। हमें ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिसमें संस्कृत के ज्ञान को आधुनिक और शोध परक दृष्टि से देखा जाए और ज्ञान के नए स्वरूप को प्रकाशित किए जाए। समय की आवश्यकता है कि हमारे पास ऐसे युवा हो, जिनमें संस्कृत के साथ कम्प्यूटर कोडिंग की तकनीक और अनुसंधान का सामर्थ्य हो।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत निर्माण प्रयासों के लिए जड़ों से जुड़ें वैश्विक प्रतिस्पर्धा हेतु सक्षम युवाओं का निर्माण समय की जरूरत है। विश्वविद्यालय को संस्कृत भाषा की भारतीय ज्ञान परम्परा को भविष्य की दृष्टि से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ समन्वय से भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने की जिम्मेदारी लेना होगी। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन और अनुसंधान के द्वारा राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान खोजने के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के समग्र, सर्वांगीण विकास में ऐसे शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल स्पर्धाओं के आयोजन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होते है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन में अग्रणी भूमिका निभाने और अखिल भारतीय प्रतियोगिता के आयोजन के लिए केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की सराहना की है।

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर मदन मोहन झा ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सांस्कृतिक गतिविधियों का विवरण दिया। बताया कि राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से प्रारम्भ होकर 55वीं वर्ष गांठ के अवसर तक विश्व में संस्कृत का पर्याय बन गया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय मल्टी डिसिप्लिनरी, बहुपरिसरीय विश्वविद्यालय है, जिसमें 12 परिसर, 28 महाविद्यालय और 105 से अधिक मान्यता प्राप्त संस्थाएं शामिल है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में भारतीय विधिशात्र, नाट्य शास्त्र के पाठ्यक्रम के साथ ही बी.ए. ऑनर्स, संस्कृत, सिविल सर्विसेज, शुरू किया गया है, जिसमें संस्कृत एवं सिविल सर्विसेज के पाठ्यक्रम का अध्ययन कराया जाता है। विद्यार्थी पाठ्यक्रम के 5 में से किसी एक विषय में स्नातकोत्तर की एक वर्षीय उपाधि भी प्राप्त कर सकते है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को नेक द्वारा A++ की ग्रेडिंग प्राप्त है। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति विगत 2 वर्षों से सफलता पूर्वक क्रियान्वित की जा रही है।

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर के निदेशक प्रोफेसर रमाकांत पांडेय ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय देश के 12 प्रांतों में प्रस्तारित है। आयोजित, प्रतियोगिता में राज्य स्तरीय स्पर्धा के विजेता शामिल हो रहे है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए विषय विशेषज्ञ विद्वान शामिल है। धन्यवाद ज्ञापन भोपाल परिसर के सहायक निदेशक प्रोफेसर नीलाभ तिवारी ने किया।

    कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा भगवती सरस्वती का दीप प्रज्ज्वलन कर पूजन किया। परिसर के छात्रों द्वारा वैदिक मंगलाचरण एवं नाट्य अनुसंधान विभाग के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का शॉल, शंख और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।

    source: http://www.mpinfo.org

  • governor Mangubhai Patel जीवाजी विश्वविद्यालय के कन्या छात्रावास पहुँचे

    governor Mangubhai Patel जीवाजी विश्वविद्यालय के कन्या छात्रावास पहुँचे

    governor Mangubhai Patel : छात्राओं को दी शुभकामनायें और सुविधाओं के बारे में ली जानकारी

    राज्यपाल Mangubhai Patel ने मंगलवार को जीवाजी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में स्थित लक्ष्मीबाई कन्या छात्रावास का जायजा लिया। इस अवसर पर उन्होंने छात्राओं से चर्चा की और छात्रावास में मिल रहीं सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने छात्राओं को सुखद भविष्य के लिए शुभकामनायें दीं, साथ ही कहा कि वे पूरी मेहनत व लगन के साथ पढ़ाई करें। उन्होंने कहा केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये तमाम योजनायें संचालित की जा रही हैं। छात्राएं इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपना भविष्य उज्ज्वल करें।

    राज्यपाल श्री पटेल द्वारा किए गए छात्रावास के भ्रमण के दौरान जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अविनाश तिवारी सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    source: http://www.mpinfo.org

  • Governor Mangubhai Patel: विद्यार्थी भावी जीवन में निरंतर सीखने की भावना जागृत रखें

    Governor Mangubhai Patel: विद्यार्थी भावी जीवन में निरंतर सीखने की भावना जागृत रखें

    Governor Mangubhai Patel : पद्मभूषण डॉ. विजय पी. भटकर और डॉ. नरेन्द्र नाथ लाहा मानद उपाधि से सम्मानित

    • दीक्षांत समारोह में 126 गोल्ड मैडल, 297 पीएचडी एवं 397 स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्रदान की गईं
    • जीवाजी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह
    Governor Mangubhai Patel ने कहा कि विद्यार्थी भावी जीवन में निरंतर सीखने की भावना जागृत रखें और “अन-लर्निंग, रि-स्किलिंग व अप-स्किलिंग” पर विशेष ध्यान दें। साथ ही यह संकल्प लें कि जीवन के उतार-चढ़ाव और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों, ज्ञान और आचरण के उच्चतम प्रतिमानों का निष्ठा के साथ पालन करेंगे। राज्यपाल श्री पटेल ने यह बात जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कही। उन्होंने गोल्ड मैडल व उपाधियाँ प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावक व गुरुजनों को बधाई दी और सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
  • Governor Mangubhai Patel ने किया जन-जातीय अध्ययन एवं विकास केन्द्र का लोकार्पण

    Governor Mangubhai Patel ने किया जन-जातीय अध्ययन एवं विकास केन्द्र का लोकार्पण

     Mangubhai Patel: विशेष पिछड़ी जनजाति के हितग्राहियों से की चर्चा और योजनाओं के बारे में बताया

    Governor Mangubhai Patel ने ग्वालियर प्रवास के दौरान “जनजातीय अध्ययन एवं विकास केन्द्र” का लोकार्पण किया। इस केन्द्र की स्थापना प्रदेश की सबसे पिछड़ी जनजातियों में शुमार सहरिया जनजाति सहित प्रदेश की अन्य जनजातियों की संस्कृति के अध्ययन एवं विकास के उद्देश्य से राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में की गई है। राज्यपाल ने इस अवसर पर यहाँ लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

    मेला रोड़ पर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में इस केन्द्र के लोकार्पण के बाद राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने यहाँ पर कड़कनाथ मुर्गी पालन विषय पर चल रहे प्रशिक्षण में मौजूद श्योपुर व झाबुआ जिले के अनुसूचित जनजाति के कृषकों से उनकी आजीविका के बारे में चर्चा की। साथ ही सरकार द्वारा प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए संचालित कल्याणकारी एवं रोजगारमूलक योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जनजाति के हितग्राहियों का आह्वान किया कि वे सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर अपने आपको आत्मनिर्भर बनाएँ। साथ ही अपने समुदाय के अन्य लोगों को भी इसके लिये प्रेरित करें।

    “जनजातीय अध्ययन एवं विकास केन्द्र” के लोकार्पण कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय पूसा के कुलाधिपति प्रो. पी एल गौतम, भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री दिनेश कुलकर्णी एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला मौजूद थे।

    “जनजातीय अध्ययन एवं विकास केन्द्र” के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुँचे सभी अतिथियों का नोडल अधिकारी श्री शैलेन्द्र सिंह कुशवाह ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर इस केन्द्र की संचालन समिति के सदस्यगण डॉ. एस पी एस तोमर, डॉ. एस सी श्रीवास्तव एवं डॉ. जे एस राजपूत सहित कृषि विज्ञान केन्द्र के अन्य वैज्ञानिक उपस्थित थे।

    source:http://www.mpinfo.org


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home/jcaxzbah/hindinewslive.in/wp-includes/functions.php on line 5464