अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में इस बार एक खास आकर्षण का केंद्र बने हैं जेलों में बंद बंदियों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प उत्पाद। मेले में आए पर्यटक न केवल इन वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि बंदियों के कौशल और उनके सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी खुलकर सराहना कर रहे हैं। यह पहल हरियाणा सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को जमीन पर उतारने का एक प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई है।
मेले में लगाए गए इस विशेष स्टॉल पर लकड़ी, कपड़े, धातु और अन्य सामग्री से बने कई तरह के सजावटी और उपयोगी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। इन सभी वस्तुओं को हरियाणा की विभिन्न जेलों में बंद कैदियों द्वारा तैयार किया गया है। इन उत्पादों की गुणवत्ता और कारीगरी देखकर कई पर्यटक हैरान हैं और उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि ये सामान जेलों के भीतर तैयार किए गए हैं। लोग न सिर्फ इन वस्तुओं को खरीद रहे हैं, बल्कि इनसे जुड़ी कहानियों में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, जेल विभाग का उद्देश्य बंदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए हुनरमंद बनाना भी है। इसी सोच के तहत जेलों में विभिन्न प्रकार के कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को हस्तशिल्प, सिलाई, बढ़ईगीरी, पेंटिंग और अन्य कामों का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे जेल से बाहर आने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।
शिल्प मेले में आए कई पर्यटकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम न केवल बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है, बल्कि समाज में उनके प्रति सोच को भी बदल रहा है। एक पर्यटक ने कहा कि इन उत्पादों को खरीदते समय उन्हें यह एहसास हो रहा है कि वे किसी की जिंदगी को नई दिशा देने में छोटा सा योगदान दे रहे हैं।
हरियाणा सरकार का मानना है कि इस तरह की पहल से बंदियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें यह विश्वास पैदा होता है कि वे भी समाज के लिए उपयोगी बन सकते हैं। इसके साथ ही, इन उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली आय का एक हिस्सा बंदियों के कल्याण और उनके परिवारों की मदद में भी लगाया जाता है, जिससे उनका पुनर्वास और भी मजबूत होता है।
यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी मजबूती देती है। जेलों के भीतर तैयार किए गए ये उत्पाद आज न केवल हरियाणा, बल्कि देश-विदेश से आए पर्यटकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे इनकी पहचान और भी व्यापक हो रही है। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तार दिया जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बंदियों को इस तरह के प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा।
कुल मिलाकर, सूरजकुंड शिल्प मेले में बंदियों के हुनर की यह प्रस्तुति न केवल कला और कारीगरी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है।


