विश्वभर में ‘शिल्प महाकुंभ’ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला-2026 एक बार फिर अपनी पूरी भव्यता और सांस्कृतिक रंगों के साथ सजने को तैयार है। हरियाणा के फरीदाबाद स्थित ऐतिहासिक सूरजकुंड परिसर में आयोजित होने वाला यह प्रतिष्ठित मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक कला, संस्कृति और परंपरा का जीवंत संगम प्रस्तुत करेगा। देश-विदेश से आने वाले हजारों शिल्पी, कलाकार और पर्यटक इस आयोजन को वैश्विक पहचान दिलाते हैं।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला भारतीय हस्तशिल्प, लोककला और पारंपरिक संस्कृति को समर्पित एक अनूठा मंच है। मेले में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ कई विदेशी देशों के शिल्पी अपनी-अपनी विशिष्ट कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। मिट्टी, लकड़ी, धातु, कपड़ा, बांस और पत्थर से बनी कलाकृतियां न केवल शिल्प कौशल का उदाहरण होंगी, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की कहानी भी सुनाएंगी।
मेले की सबसे बड़ी विशेषता यहां देखने को मिलने वाली विविधता है। एक ओर जहां राजस्थान की रंगीन कठपुतलियां, कश्मीर की कशीदाकारी शॉल, बनारस की सिल्क साड़ियां और पूर्वोत्तर भारत के बांस शिल्प आकर्षण का केंद्र होंगे, वहीं दूसरी ओर अफ्रीका, एशिया, यूरोप और अन्य देशों के शिल्पी भी अपनी लोककला और हस्तशिल्प के माध्यम से सांस्कृतिक सेतु का निर्माण करेंगे। यह मेला “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार करता है।
लोक संगीत और लोक नृत्य इस मेले की आत्मा हैं। हर शाम देश-विदेश के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली सांस्कृतिक संध्याएं दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देंगी। ढोल, नगाड़े, बीन, रबाब और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर थिरकते लोक नृत्य भारतीय लोकसंस्कृति की समृद्ध झलक पेश करेंगे। यह मंच उभरते कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करता है।
सूरजकुंड मेला ‘स्वदेशी’ की भावना को भी सशक्त रूप से आगे बढ़ाता है। यहां हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी कर पर्यटक न केवल शिल्पियों को आर्थिक सहयोग देते हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करते हैं। मेले में पारंपरिक भारतीय व्यंजनों का स्वाद भी पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों की खानपान संस्कृति एक ही स्थान पर देखने को मिलती है।
हरियाणा सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित यह मेला न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को भी नया जीवन देता है। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला-2026 कला, संस्कृति और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कुल मिलाकर, 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक चलने वाला सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा। भारतीय विरासत के इस जीवंत उत्सव में शामिल होकर पर्यटक न केवल मनोरंजन करेंगे, बल्कि संस्कृति, परंपरा और स्वदेशी गौरव से भी जुड़ेंगे।


