हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव को प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत विजन का जीवंत उदाहरण बताया। मेले में 50 से अधिक देशों के कलाकारों और कारीगरों ने भाग लिया।
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का एक सशक्त और जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि यह मेला “लोकल से ग्लोबल” के मंत्र को साकार करता हुआ भारतीय कला, संस्कृति और शिल्प को विश्व मंच पर पहचान दिला रहा है। राज्यपाल यह बात 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कह रहे थे।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला अब केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक वाइब्रेंट ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां परंपरा और नवाचार साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। इस मेले के माध्यम से देश के स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और लोक कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है, जो आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूती देता है।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष ने सहकारिता, पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विपुल गोयल और मेयर प्रवीण बत्रा जोशी के साथ मेले का अवलोकन भी किया। इस दौरान अतिथियों का ‘आपणा घर’ में पारंपरिक हरियाणवी पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिल्पकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की सामूहिक भावना को भी खूबसूरती से प्रस्तुत करता है। मेले में देश और विदेश से आए कारीगरों, बुनकरों और लोक कलाकारों के कौशल, दृढ़ निश्चय और रचनात्मकता की झलक साफ देखने को मिली है।
राज्यपाल ने बताया कि इस वर्ष मिस्र चौथी बार पार्टनर नेशन के रूप में शामिल हुआ, जिससे भारत और मिस्र के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूती मिली है। वहीं थीम स्टेट के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय ने अपनी समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर मेले को और आकर्षक बनाया।
उन्होंने कहा कि इस बार मेले में 50 से अधिक देशों के करीब 800 कलाकारों और कारीगरों ने भाग लिया, जो सूरजकुंड मेले के बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाता है। यह मेला पारंपरिक शिल्प के संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अंत में राज्यपाल ने विश्वास जताया कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव आने वाले वर्षों में भी दुनिया के संस्कृति और पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाए रखेगा और भारतीय शिल्पकारों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक साबित होगा। उन्होंने देश के शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे भारतीय कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने में अपना सक्रिय योगदान देते रहें।


