Sindhi Teej 2025: जानें 12 अगस्त 2025 को मनाई जाने वाली तीजड़ी व्रत की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व। पति की लंबी उम्र और सौभाग्य की रक्षा के लिए सिंधी समाज की महिलाओं का विशेष उपवास।
Sindhi Teej 2025: सिंधी समुदाय में तीज का पर्व, जिसे तीजड़ी व्रत भी कहा जाता है, एक पवित्र और विशेष व्रत है जो विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए करती हैं। यह व्रत सावन पूर्णिमा के तीन दिन बाद, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
तीजड़ी व्रत 2025 की तारीख
तिथि: 12 अगस्त 2025 (मंगलवार)
इस दिन सिंधी समाज की महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और परंपरागत विधियों से तीजड़ी माता की पूजा करती हैं।
तीजड़ी व्रत का महत्व
तीजड़ी व्रत को सिंधी समाज में उतनी ही आस्था और श्रद्धा से मनाया जाता है जितना हरियाली तीज, कजरी तीज या करवा चौथ को। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सौभाग्य की रक्षा और मातृत्व सुख की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह व्रत वे स्त्रियां भी करती हैं जिनकी शादी तय हो चुकी हो या जो सुयोग्य वर की प्राप्ति की कामना करती हैं।
तीजड़ी व्रत की पूजा विधि
1. मुसाग की रस्म
सुबह महिलाएं विशेष औषधीय जड़ी-बूटी ‘मुसाग’ से दांत साफ करती हैं, जो शुद्धता का प्रतीक मानी जाती है।
2. असुर का सेवन (सरगी जैसा भोज)
सूर्योदय से पहले महिलाएं ‘असुर’ खाती हैं, जिसमें कोकी, लोल (गुड़/चीनी से बनी मोटी रोटी), रबड़ी और मिठाई शामिल होती है।
3. टिकाने की पूजा
सिंधी समुदाय के पूजा स्थल को ‘टिकाना’ कहा जाता है।
वहाँ मिट्टी के पात्र में गेहूं या आम का पौधा लगाकर पूजा की जाती है।
पूजा में गाजर, तुलसी, मीठा पानी और चावल चढ़ाए जाते हैं।
4. तीजड़ी माता की पूजा और कथा
महिलाएं सोलह श्रृंगार करके तीजड़ी माता की पूजा करती हैं।
इसके बाद व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
5. चंद्रमा को अर्घ्य
रात में चंद्रमा को कच्चा दूध, चीनी, चावल और खीरे से अर्घ्य देते हुए ये मंत्र बोला जाता है: “तीजड़ी आये, खुम्बरा वेसा करे, आयों जो गोरियों, लोटियों खीर भरे।”
6. व्रत पारण
चंद्र दर्शन और पूजा के बाद महिलाएं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का समापन करती हैं।
तीजड़ी माता की पूजा क्यों की जाती है?
तीजड़ी माता को प्रजनन क्षमता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
गेहूं और मूंग के बीज बोने की परंपरा इसके साथ जुड़ी हुई है, जो जीवन की उर्वरता का संकेत है।
यह व्रत करने से स्त्रियों को मातृत्व सुख, पति का सहयोग, और परिवार में खुशहाली प्राप्त होती है।
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