1857 की प्रथम स्वतंत्रता क्रांति में अपने अदम्य शौर्य, साहस और देशभक्ति से अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेने वाले भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, बल्लभगढ़ रियासत के सेनापति शहीद गुलाब सिंह सैनी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें शत-शत नमन। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अमर अध्यायों में शामिल है, जिसने देशवासियों के हृदय में स्वाधीनता की ज्वाला को और प्रखर किया।
शहीद गुलाब सिंह सैनी जी बल्लभगढ़ रियासत के वीर सेनापति थे और उन्होंने राजा नाहर सिंह के नेतृत्व में 1857 के संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब देश के विभिन्न हिस्सों में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी भड़की, तब बल्लभगढ़ भी इस क्रांति का सशक्त केंद्र बना। गुलाब सिंह सैनी जी ने अपने नेतृत्व और रणकौशल से अंग्रेजी सेना को कड़ी चुनौती दी और स्थानीय जनमानस को स्वतंत्रता संग्राम के लिए संगठित किया।
इतिहास गवाह है कि उस दौर में अंग्रेजी सत्ता अत्यंत संगठित और संसाधनों से संपन्न थी, जबकि भारतीय सेनानियों के पास सीमित साधन थे। इसके बावजूद गुलाब सिंह सैनी जी ने अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। वे केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी थे, जिन्होंने सीमित संसाधनों में भी प्रभावी प्रतिरोध खड़ा किया।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों ने बल्लभगढ़ की बढ़ती ताकत को खतरे के रूप में देखा और विद्रोह को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाए। अंततः शहीद गुलाब सिंह सैनी जी को पकड़ लिया गया और उन्हें क्रूर यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने मातृभूमि की आज़ादी के संकल्प से कभी समझौता नहीं किया। देश के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों का बलिदान देकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि स्वतंत्रता का मार्ग बलिदान और त्याग से होकर गुजरता है।
आज शहीद गुलाब सिंह सैनी जी का नाम साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता। बल्लभगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में उनकी वीरगाथा आज भी श्रद्धा और गर्व के साथ स्मरण की जाती है।
बलिदान दिवस के अवसर पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और देशभक्त संगठनों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आज़ादी हमें यूं ही नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे गुलाब सिंह सैनी जैसे अनगिनत वीर सपूतों का रक्त और बलिदान समर्पित है। उनका जीवन और संघर्ष सदैव राष्ट्रसेवा, साहस और आत्मबल की प्रेरणा देता रहेगा।


