समराला (पंजाब)। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर पंजाब के श्री भैणी साहिब, समराला में सतगुरु श्री राम सिंह जी की 210वीं जयंती बड़े श्रद्धा भाव और उत्साह के साथ मनाई गई। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में सतगुरु राम सिंह जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके जीवन, विचारों और योगदान को स्मरण किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी का जीवन मानवता, नैतिकता और राष्ट्रहित पर आधारित सच्चे विकास की प्रेरणा देता है। उन्होंने समाज को आत्मनिर्भरता, सत्य, अहिंसा और नैतिक आचरण का मार्ग दिखाया। उनका चिंतन केवल आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक सुधार, स्वदेशी चेतना और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास से गहराई से जुड़ा हुआ था।
समारोह को संबोधित करते हुए बताया गया कि सतगुरु राम सिंह जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई और लोगों को आत्मसम्मान, अनुशासन और सादगी का संदेश दिया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा विकास वही है, जो मानव मूल्यों और नैतिकता के साथ आगे बढ़े। उनके विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जब समाज को नैतिक और सांस्कृतिक मजबूती की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजक समिति की ओर से एक महत्वपूर्ण मांग रखी गई, जिस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए यह आश्वासन दिया गया कि समिति के सदस्यों से विचार-विमर्श के उपरांत हरियाणा सरकार द्वारा सतगुरु राम सिंह जी महाराज के नाम पर ‘चेयर’ की स्थापना की जाएगी। यह चेयर उनके विचारों, दर्शन और सामाजिक योगदान के अध्ययन, शोध और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित होगी।
वक्ताओं ने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी के नाम पर चेयर की स्थापना से उनकी शिक्षाओं को शैक्षणिक और शोध के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे न केवल उनके विचारों का संरक्षण होगा, बल्कि समाज को उनके सिद्धांतों के अनुरूप दिशा देने में भी सहयोग मिलेगा। इस घोषणा का श्रद्धालुओं और आयोजक समिति ने स्वागत किया और इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया।
बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित इस समारोह में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सत्संग का भी आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती से ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की कामना करते हुए सतगुरु राम सिंह जी के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
समारोह के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। सतगुरु राम सिंह जी की 210वीं जयंती का यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का एक प्रेरक संदेश भी लेकर आया।


