आस्था, संस्कृति और ज्ञान की प्रतीक देवी सरस्वती की पावन स्मृति में बसंत पंचमी के अवसर पर हरियाणा सरकार द्वारा आज से भव्य ‘सरस्वती महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव 23 जनवरी 2026 तक चलेगा और प्रदेश के विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से सरस्वती धरोहर, कला-संस्कृति और जल संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेगा।
सरस्वती महोत्सव का शुभारंभ यमुनानगर जिले के आदिबद्री से किया गया है, जिसे सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। आदिबद्री से आरंभ होकर यह महोत्सव पूरे प्रदेश में सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव का संदेश देगा। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चारण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से सरस्वती नदी के महत्व को रेखांकित किया गया।
महोत्सव के दौरान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश के विद्वान, इतिहासकार, पुरातत्वविद और पर्यावरण विशेषज्ञ भाग लेंगे। संगोष्ठी में सरस्वती नदी के ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पक्षों पर गहन मंथन होगा। विद्वान अपने शोध पत्रों के माध्यम से सरस्वती सभ्यता, वैदिक काल और वर्तमान संदर्भ में नदी संरक्षण जैसे विषयों पर विचार साझा करेंगे।
इसके साथ ही, राखीगढ़ी और कुनाल जैसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर सरस्वती नदी और सिंधु-सरस्वती सभ्यता से जुड़ी विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इन प्रदर्शनों के माध्यम से आम जनता को प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और जीवनशैली की जानकारी दी जाएगी। यह प्रदर्शनी विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों के लिए इतिहास को समझने का एक जीवंत माध्यम बनेगी।
सरस्वती महोत्सव का समापन पिहोवा, सरस्वती नगर, यमुनानगर, कैथल और जींद के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर आयोजित समारोहों के साथ होगा। इन स्थलों पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ लोक कला, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच मिलेगा।
हरियाणा सरकार का उद्देश्य इस महोत्सव के माध्यम से सरस्वती नदी की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करना, सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना और जल संरक्षण के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि सरस्वती महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी एक सशक्त मंच सिद्ध होगा।
बसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर आरंभ हुआ सरस्वती महोत्सव प्रदेशवासियों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। यह आयोजन आस्था, संस्कृति और सरस्वती की अमूल्य विरासत को संजोने तथा भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


