गणतंत्र दिवस 2026 के भव्य समारोह में पंजाब सरकार की झांकी ने अपनी गहन आध्यात्मिक थीम और ऐतिहासिक संदेश के माध्यम से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस झांकी के जरिए मानवता की एकता, करुणा और निस्वार्थ बलिदान की भावना को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया गया। आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, झांकी का मूल उद्देश्य भारत की आध्यात्मिक विरासत, सामाजिक सौहार्द और मानव मूल्यों को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना रहा।
झांकी को दो प्रमुख भागों—ट्रैक्टर और ट्रेलर—में विभाजित किया गया था, जिनमें सिख इतिहास और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
ट्रैक्टर भाग में मानवता का प्रतीकात्मक संदेश
झांकी के ट्रैक्टर हिस्से में एक विशाल हाथ का प्रतीक दर्शाया गया, जो मानवता, सेवा और करुणा की आध्यात्मिक आभा को प्रकट करता है। इस भाग में घूमता हुआ दिव्य “एक ओंकार” प्रतीक सभी मानवों की एकता और ईश्वर की एकता का संदेश देता दिखाई दिया। इसके साथ ही ‘हिंद दी चादर’ का प्रतीकात्मक वस्त्र प्रदर्शित किया गया, जो उत्पीड़ितों, शरणार्थियों और कमजोर वर्गों को संरक्षण देने की भावना को दर्शाता है। यह प्रतीक सिख परंपरा में बलिदान और मानवता की रक्षा के आदर्श को रेखांकित करता है।
ट्रेलर भाग में शहादत और भक्ति की जीवंत झलक
झांकी के ट्रेलर हिस्से में रागी सिंहों द्वारा शबद कीर्तन का भावपूर्ण आयोजन प्रस्तुत किया गया। इसके पृष्ठभूमि में खंडा साहिब का स्मारक दर्शाया गया, जो दिल्ली स्थित गुरुद्वारा श्री सिस गंज साहिब के सामने प्रतिदिन होने वाले शबद कीर्तन की परंपरा को दर्शाता है। ट्रेलर के दोनों ओर गुरु साहिब के महान अनुयायियों—भाई मति दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी—की शहादत को चित्रित किया गया। ये सभी गुरु तेग बहादुर साहिब जी के उच्च आदर्शों, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता के सर्वोच्च मूल्यों के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान शहीद थे।
धार्मिक और ऐतिहासिक आयोजनों की श्रृंखला
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के मार्गदर्शन में पंजाब सरकार ने नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ को ऐतिहासिक स्तर पर मनाया। 23 से 29 नवंबर 2025 तक श्री आनंदपुर साहिब में श्रद्धा और सम्मान के साथ विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि इतिहास में पहली बार पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र भाई जैता जी स्मारक पर आयोजित किया गया। धार्मिक आयोजनों की शुरुआत 25 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली के गुरुद्वारा श्री सिस गंज साहिब में अरदास के साथ हुई। श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, फरीदकोट और गुरदासपुर से नगर कीर्तन श्री आनंदपुर साहिब पहुंचे। इसके अतिरिक्त, पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में भी नगर कीर्तन और श्रद्धा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।
गणतंत्र दिवस पर प्रस्तुत पंजाब सरकार की यह झांकी केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा में निहित करुणा, एकता और बलिदान के मूल्यों का प्रभावशाली संदेश बनकर उभरी।


