RBI Repo Rate: आरबीआई ने इस महीने पहले ही रेपो रेट में कमी की है। रेपो में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद यह 6% हो गया है।
RBI Repo Rate: इस साल EMI में वृद्धि हो सकती है, जिससे घर और कार लोन लेने वालों को राहत मिलेगी। इसकी वजह है अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ की वजह से विश्वव्यापी अनिश्चतता। ऐसे में आरबीआई रेपो रेट को और कम कर सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घरेलू मोर्चे पर आर्थिक रफ्तार में कमी की चिंता और महंगाई के चलते आगे आरबीआई रेपो रेट को कम करने के लिए और कदम उठाने की संभावना है।
यानी अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर के बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर धीमी रफ्तार की आशंका बढ़ सकती है। यही कारण है कि केन्द्रीय बैंक अपनी नीति में और ढील देकर आक्रामक रुख अपना सकता है।
Nomura इकॉनोमिस्ट सोनल वर्मा और अरोदीप नंदी ने हाल ही में एक नोट में कहा, “ग्रोथ को बरकरार रखने के लिए तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में रेपो रेट 5.00 प्रतिशत से 5.50% तक बढ़ सकता है।”
इस महीने आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करके इसे 6 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने हालांकि महंगाई और जीपीडी में कमी का अनुमान लगाया है। जीपीडी 6.5 प्रतिशत और महंगाई दर 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
लेकिन जानकारों का मानना है कि इसमें अधिक अवसर बचे हैं। Nomura का अनुमान है कि इस वर्ष लगभग सौ प्वाइंट्स की राहत मिल सकती है। यानी, जून, अगस्त, अक्टूबर और दिसंबर में हर क्वार्टर में पॉलिसी बैठक में राहत की घोषणा की जा सकती है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि व्यापारिक तनाव को कम करना बहुत मुश्किल होगा। लेकिन बहुत से अर्थशास्त्री मानते हैं कि राहत उम्मीद से अधिक हो सकती है।
ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस वर्ष रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की और कमी हो सकती है। सस्ते लोन, मासिक EMI और कम ब्याज दरों से यानी उपभोक्ता खुश होंगे।
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