Ram Stuti Benefits: श्रीराम स्तुति का महत्व, पाठ विधि, लाभ और हिंदी अर्थ जानिए। नियमित पाठ से जीवन की परेशानियां होंगी दूर और मिलेगा आत्मिक बल और मोक्ष।
Ram Stuti Benefits: श्रीराम स्तुति का पाठ न केवल मन को शांति देता है, बल्कि जीवन की कठिनाइयों को दूर करने का भी सशक्त माध्यम है। श्रीराम की स्तुति करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
श्रीराम स्तुति का महत्व (Ram Stuti Benefits)
श्रीराम स्तुति भगवान राम के चरित्र, गुण, त्याग, प्रेम और न्याय का गुणगान करती है।
इसे पढ़ने से मानसिक तनाव, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
जीवन में आत्मिक शांति, साहस और धैर्य की प्राप्ति होती है।
- पौराणिक मान्यता है कि श्रीराम स्तुति करने से मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति होती है।
श्रीराम स्तुति पाठ विधि
सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान पर श्रीराम जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
लाल या पीले रंग का आसन बिछाकर बैठें।
श्रीराम जी की पूजा करें – धूप, दीप, पुष्प, चंदन अर्पित करें।
108 बार “ॐ श्रीरामाय नमः” का जाप करें।
श्रीराम स्तुति का पाठ श्रद्धा से 5 या 11 बार करें।
श्रीराम स्तुति पाठ के लाभ
मानसिक एकाग्रता और शांति की प्राप्ति
आत्मबल, साहस और निर्भयता में वृद्धि
जीवन की कठिनाइयों और रुकावटों से मुक्ति
पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश
मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति
श्री राम स्तुति हिंदी में (Ram Stuti Benefits)
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
अर्थात्, हे मन! कृपया श्रीरामचंद्रजी का भजन करो, जो दुनिया के भय को दूर करेंगे। उनकी आंखें, मुख, हाथ और चरण नव खिले हुए कमलों की तरह सुंदर और ललिमा हैं।
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि,नोमि जनक सुतावरं ॥२॥
अर्थात्: श्रीराम अनगनित कामदेवों की कल्पना को भंग करेंगे। उसकी सुंदर शरीर नवनील जलधर (नीले आकाश) की तरह है। बिजली की तरह पीतांबर कपड़े चमकते हैं। मैं जनक पुत्री सीता के पति श्रीराम को प्रणाम करता हूँ।
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव, दैत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल,चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥
अर्थात्: श्रीराम दोनों के मित्र, सूर्य की तरह तेजस्वी हैं, और दानवों और देवताओं का नाश करेंगे। वे दशरथ जी के पुत्र हैं, कोशलपुर (अयोध्या) के चंद्रमा के सामान हैं और रघुकुल के आनंद मूल हैं।
शिर मुकुट कुंडल तिलक, चारु उदारु अङ्ग विभूषणं । आजानु भुज सर चाप धर,संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥
अर्थात्: उनके कानों में तिलक और कुंडल और सिर पर मुकुट है। उनके अंगो पर अद्भुत आभूषण खूबसूरत लगते हैं। उनकी भुजाएं घुटनों तक फैली हुई हैं। जिनके हाथों में धनुष बाण सुशोभित है, वे श्रेष्ठ युद्धक हैं।
इति वदति तुलसीदास शंकर,शेष मुनि मन रंजनं । मम् हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खलदल गंजनं ॥५॥
अर्थात्, हे प्रभु, जैसे आप शेषनाग, शिव और ऋषि को प्रसन्न करते हैं, मेरे मन को भी प्रसन्न करो। मेरे हर्दय में सदा रहो और काम, क्रोध और मोह से छुटकारा पाओ।
मन जाहि राच्यो मिलहि सो, वर सहज सुन्दर सांवरो ।, करुणा निधान सुजान शील, स्नेह जानत रावरो ॥६॥
अर्थात्: जो इच्छा मन में होती है, वही वर मिलता है। यदि आपका मन प्रभु श्रीरम की तरह सुंदर, सहज, सांवले और सौम्य हो तो वे स्नेह को जानने वाले, करुणा के भंडार और सच्चे स्वामी हैं।
एहि भांति गौरी असीस सुन सिय, सहित हिय हरषित अली।, तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि, मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥
अर्थात्: माता गौरी ने मां सीता को एक अच्छा पति, एक मंगलमय जीवन और सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया था। इस आशीर्वाद से सीता बहुत खुश हुई। वे प्रेम और श्रद्धा से मां सीता की बार-बार पूजा करते हैं और फिर खुशी-खुशी अपने स्थान पर जाते हैं।
सोरठा
जानी गौरी अनुकूल सिय, हिय हरषु न जाइ कहि । मंजुल मंगल मूल वाम, अङ्ग फरकन लगे।
अर्थात्: सीता जी को जब पता चला कि मां गौरी उन्हें अपने मन के योग्य वर (श्रीराम) के लिए आशीर्वाद दे रही हैं, तो वे बेहद प्रसन्न हुए। वे आनंद इतना गहरा था कि शब्दों में वर्णित नहीं होता। उनके बायां अंगों, जैसे उनकी भुजा, पैर और आंख, फड़कने लगे। जो भविष्य में सुखद घटना का संकेत है।
For more news: Religion


