पंजाब से नशे के पूर्ण ख़ात्मे के उद्देश्य से शुरू की गई ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ मुहिम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आज चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अभियान के दूसरे चरण की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक का उद्देश्य नशे के खिलाफ चल रहे प्रयासों का मूल्यांकन करना और आगामी रणनीति को और मजबूत करना रहा।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने अब तक की कार्रवाई, ज़मीनी स्तर पर हो रही प्रगति और सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तृत जानकारी दी। बताया गया कि अभियान के दूसरे चरण में नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने और नशा पीड़ितों को पुनर्वास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि यह चरण नशे के मुकम्मल ख़ात्मे की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से विलेज डिफेंस कमेटियों (VDC) की भूमिका को और सशक्त बनाने पर सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में VDC की एक राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि गांव स्तर पर निगरानी, जागरूकता और सहयोग को और मजबूत किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि VDC के माध्यम से नशा तस्करी की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। गांवों में सामाजिक दबाव और सामूहिक जिम्मेदारी के जरिए नशे के खिलाफ माहौल तैयार करने की रणनीति पर जोर दिया गया।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार नशा पीड़ितों को केवल दंडित करने के बजाय पुनर्वास और उपचार के अवसर उपलब्ध कराने के पक्ष में है। इसके तहत नशा मुक्ति केंद्रों को सशक्त किया जा रहा है, काउंसलिंग सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और युवाओं को शिक्षा व रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान को लेकर सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई हुई है। नशा तस्करों और इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, अंतर-जिला और अंतर-राज्य समन्वय को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि नशे की सप्लाई चेन को जड़ से खत्म किया जा सके।
अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन, पुलिस और समाज के संयुक्त प्रयासों से पंजाब को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य अवश्य हासिल किया जा सकेगा। चंडीगढ़ में हुई यह बैठक ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ मुहिम को नई गति देने और इसे जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


