पंजाब सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाते हुए राज्य के सभी आंगनवाड़ी, प्लेवे और प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए एक समान सिलेबस लागू करने की घोषणा की है। इस नई व्यवस्था के तहत बच्चों को पारंपरिक रटने वाली शिक्षा से हटाकर खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाना है।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट मंत्री बलजीत कौर ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास पांच वर्ष की आयु तक हो जाता है। ऐसे में इस आयु वर्ग के बच्चों पर किताबों का अनावश्यक बोझ डालने के बजाय उन्हें रचनात्मक और सकारात्मक माहौल देना अधिक जरूरी है। इसी सोच के साथ सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा में बड़ा सुधार करने का निर्णय लिया है।
मंत्री बलजीत कौर ने बताया कि नए सिलेबस में पढ़ाई को खेल, गतिविधियों और संवादात्मक तरीकों से जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों में सीखने के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होगी और वे बिना दबाव के नई चीजें समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि खेलों और इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा देने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनकी कल्पनाशक्ति को भी सही दिशा मिलेगी।
इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आंगनवाड़ी कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग कराई जा रही है। मंत्री ने जानकारी दी कि फरवरी तक सभी आंगनवाड़ी स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा कर लिया जाएगा, ताकि वे नई शिक्षण पद्धति को बेहतर तरीके से बच्चों तक पहुंचा सकें। प्रशिक्षित स्टाफ बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करते हुए उन्हें सीखने का आनंददायक अनुभव देगा।
सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम उठाए हैं। इस पहल के तहत 1,000 नए आंगनवाड़ी केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 700 केंद्रों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इन केंद्रों में खुले और हवादार कमरे, बच्चों के लिए सुरक्षित रसोई, आराम गृह और आकर्षक क्लासरूम बनाए गए हैं। क्लासरूम को वॉल पेंटिंग, रंगीन चित्रों और बच्चों के अनुकूल फर्नीचर से सजाया जा रहा है, ताकि सीखने का माहौल रोचक बने।
इस मिशन में माता-पिता की भूमिका को भी अहम माना गया है। सरकार डिजिटल और फोन के माध्यम से अभिभावकों को मार्गदर्शन दे रही है कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई में किस तरह सहयोग कर सकते हैं। मंत्री के अनुसार, इस सहभागिता के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और बच्चों के व्यवहार व सीखने की क्षमता में सुधार देखा जा रहा है।
पंजाब सरकार का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा में किया गया यह सुधार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत आधार देगा। एक समान सिलेबस, आधुनिक सुविधाएं और खेल आधारित शिक्षण प्रणाली से न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित होगा। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


