डॉ. बलबीर सिंह ने राज्य स्तरीय समीक्षा में प्राथमिक स्वास्थ्य नेटवर्क मजबूत करने, 550+ नए आम आदमी क्लिनिक, मुफ्त दवाएं और डिजिटल सुधारों पर जोर दिया।
पंजाब में मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को तेज करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सिविल सर्जनों और डिप्टी मेडिकल कमिश्नरों की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जमीनी स्तर पर प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन किया गया और प्राथमिक व द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं के अगले चरण के सुधारों का रोडमैप तय किया गया। चर्चा का फोकस मरीज-केंद्रित सेवा, डिजिटल सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और जिलों में सख्त मॉनिटरिंग मैकेनिज्म पर रहा।
डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राज्य में इस समय 881 आम आदमी क्लिनिक सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और इनमें मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले एक महीने में गर्भवती महिलाओं की विज़िट में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान राज्य स्तर पर 29 प्रतिशत तक पहुंची है, जिससे समय रहते इलाज संभव हो पा रहा है और मातृ व नवजात स्वास्थ्य को सुरक्षा मिल रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने ऐलान किया कि 243 नए आम आदमी क्लिनिक पाइपलाइन में हैं और 308 सब हेल्थ सेंटर को अपग्रेड कर आम आदमी क्लिनिक बनाया जा रहा है। सेवाओं के विस्तार में नवजात व बाल चिकित्सा देखभाल, नियमित टीकाकरण और ओरल व प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग भी शामिल होगी। उन्होंने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य है “कम रेफर करना, ज्यादा इलाज करना” और ब्लॉक स्तर की संस्थाओं को मजबूत करना।
दवाओं की उपलब्धता को लेकर डॉ. बलबीर सिंह ने “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 14 जिलों में आम आदमी क्लिनिकों में 102 में से कम से कम 97 आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, लेकिन किसी भी तरह की कमी पर जवाबदेही तय होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले हर मरीज को निर्धारित दवाएं और जांच सेवाएं पूरी तरह मुफ्त मिलनी चाहिए। सप्लाई की निगरानी के लिए ई-औषधि और जिला स्तरीय डैशबोर्ड को और सख्त किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सेहत योजना की समीक्षा करते हुए मंत्री ने बताया कि यह योजना प्रति परिवार 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर देती है, ताकि मेडिकल इमरजेंसी में परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े। सिविल सर्जनों को निर्देश दिए गए कि सूचीबद्ध अस्पतालों में नामांकन और सेवा डिलीवरी निर्बाध रहे और कोई भी पात्र लाभार्थी इलाज से वंचित न रहे। इसके लिए CSC, आशा और PRI प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में MedLEaPR सिस्टम की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिसके जरिए मेडिको-लीगल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग को डिजिटल बनाया गया है, जिससे पारदर्शिता और मामलों के निपटारे की गति बढ़ी है। आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 22 जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब और 22 क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स पर काम शुरू हो चुका है। इनमें से 7 लैब पूरी होकर जिला अस्पतालों को सौंपी जा रही हैं, जहां एक ही छत के नीचे मॉलिक्यूलर बायोलॉजी और वायरोलॉजी समेत इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेवाएं मिलेंगी।
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सेकेंडरी केयर सुविधाओं में आवश्यक दवाओं का स्टॉक, बायोमेडिकल उपकरणों की उपलब्धता, सफाई व्यवस्था, लिफ्ट मेंटेनेंस, फायर सेफ्टी और पावर बैकअप जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और स्वच्छता सीधे तौर पर जनता के भरोसे से जुड़ी है।
सम्मेलन में मातृ मृत्यु दर में कमी, नवजात शिशु जीवित रहने की दर, टीकाकरण अभियान और टीबी डिटेक्शन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। HMIS रिपोर्टिंग में सटीकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, पंजाब STEMI और स्ट्रोक प्रोजेक्ट को सभी 23 जिलों में विस्तार देने, टेली-ECG गाइडेड थ्रोम्बोलाइसिस और हब-एंड-स्पोक स्ट्रोक मैनेजमेंट को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध 2.0’ पर बात करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में क्लस्टर रिसोर्स सेंटर्स उपचार और पुनर्वास में सहयोग कर रहे हैं। जल्द ही SOORMA (Ambassadors of Recovery) कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जो डिजिटल OOAT सिस्टम और कम्युनिटी पार्टिसिपेशन के साथ रिकवरी कर रहे लोगों को पीयर सपोर्ट देगा।
अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने जिला प्रमुखों से परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने की अपील की और कहा कि हर संकेतक और हर मरीज से जुड़ा अनुभव समय पर इलाज और सम्मानजनक देखभाल में बदलना चाहिए। उन्होंने सिविल सर्जनों को स्वास्थ्य संस्थानों के आकस्मिक निरीक्षण और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।


