77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्यवासियों को संबोधित करते हुए पंजाब के संवैधानिक अधिकारों की मजबूती से पुष्टि की। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ और पंजाब से जुड़े विश्वविद्यालयों पर राज्य के दावों को दोहराया, साथ ही प्रदेश में चल रही और प्रस्तावित विकास योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उनका भाषण आत्मविश्वास, संवैधानिक प्रतिबद्धता और विकासोन्मुख दृष्टिकोण को दर्शाने वाला रहा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब भारत के संघीय ढांचे का एक सशक्त और सम्मानित राज्य है, जिसके अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब अपने संवैधानिक अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा और राज्य के हितों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंच पर आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान ही देश की एकता, अखंडता और लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ को लेकर पंजाब के ऐतिहासिक और संवैधानिक दावे को दोहराया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और इस तथ्य को कोई नकार नहीं सकता। इसी प्रकार, उन्होंने पंजाब से जुड़े विश्वविद्यालयों के मुद्दे पर भी राज्य के अधिकारों की बात रखते हुए कहा कि शिक्षा पंजाब के भविष्य की नींव है और इस पर राज्य का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रदेश की विकास योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी सरकार “जनहित, पारदर्शिता और ईमानदारी” के सिद्धांत पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, पानी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई अहम योजनाएं लागू की गई हैं। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में सुधार, मुफ्त बिजली, मोहल्ला क्लीनिक और युवाओं के लिए रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का लक्ष्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि योजनाओं को जमीन पर उतारकर आम जनता को वास्तविक लाभ पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान और दूरदर्शिता के कारण ही आज हम एक लोकतांत्रिक गणराज्य में सांस ले रहे हैं। उन्होंने राज्यवासियों से आह्वान किया कि वे जाति, धर्म और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर पंजाब की तरक्की में योगदान दें।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में पंजाब शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा। उन्होंने कहा कि मजबूत संविधान, सजग नागरिक और ईमानदार शासन के साथ पंजाब एक बार फिर देश का अग्रणी राज्य बनेगा।


