आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर आज नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में प्री-बजट परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और बजट से जुड़ी विकासात्मक प्राथमिकताओं, क्षेत्रीय आवश्यकताओं तथा आर्थिक चुनौतियों पर व्यापक और सार्थक चर्चा की गई।
प्री-बजट परामर्श बैठक का उद्देश्य आगामी बजट को अधिक समावेशी, व्यावहारिक और विकासोन्मुखी बनाना है, ताकि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे की जरूरतों, सामाजिक कल्याण योजनाओं, रोजगार सृजन, कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े सुझाव वित्त मंत्री के समक्ष रखे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट प्रस्तुत करना है, जो सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करे और देश के संतुलित विकास को गति दे। उन्होंने कहा कि राज्यों की भागीदारी और सुझाव बजट निर्माण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि जमीनी स्तर की आवश्यकताओं को समझे बिना प्रभावी नीतियां बनाना संभव नहीं है। वित्त मंत्री ने सभी प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
बैठक में विशेष रूप से पूंजीगत निवेश बढ़ाने, बुनियादी ढांचे के विकास, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित विकास, हरित ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण तथा पिछड़े वर्गों के कल्याण से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ विकासोन्मुखी नीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र से अपेक्षा जताई कि बजट 2026-27 में राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहयोग, योजनाओं के लिए लचीलापन और समय पर संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
बैठक के दौरान यह भी चर्चा की गई कि कैसे केंद्र और राज्य मिलकर रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं, विशेषकर युवाओं के लिए कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देकर। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी सुझाव दिए गए।
प्री-बजट परामर्श बैठक को नीति निर्माण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बजट प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि राज्यों को भी अपनी बात सीधे केंद्र सरकार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में आए सुझावों को शामिल कर केंद्र सरकार ऐसा बजट पेश करेगी, जो देश की आर्थिक वृद्धि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले आयोजित यह प्री-बजट परामर्श बैठक केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रही, जिसका लाभ आने वाले समय में देश की विकास यात्रा में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।


