प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और CEOs से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य जहां अनिश्चितताओं से भरा है, वहीं भारत जैसे देशों के लिए यह असीम अवसरों का द्वार भी खोलता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत आज संपूर्ण ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में एक विश्वसनीय, स्थिर और भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभर चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की मांगों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जहां ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह एक बड़ा और स्थायी बाजार प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता, पारदर्शिता और निवेश-अनुकूल माहौल सुनिश्चित किया है।
पीएम मोदी ने नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर और विंड एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों और संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया के उन अग्रणी देशों में शामिल है, जो स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में नेतृत्व करना है।
प्रधानमंत्री ने CEOs को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में निवेश का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यहां नवाचार और तकनीक को तेजी से अपनाया जाता है। स्टार्टअप इकोसिस्टम, रिसर्च और डेवलपमेंट तथा कुशल मानव संसाधन भारत को अन्य देशों से अलग बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी को बढ़ावा दे रही है, ताकि नई तकनीकों का विकास और त्वरित क्रियान्वयन संभव हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भरोसा भी दिलाया कि भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को केवल बाजार ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सहयोग और नीति समर्थन भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की योजनाएं अल्पकालिक लाभ से अधिक दीर्घकालिक स्थिरता पर आधारित हैं, जिससे निवेशकों का जोखिम कम होता है और लाभ की संभावनाएं बढ़ती हैं।
उन्होंने वैश्विक कंपनियों से आह्वान किया कि वे भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार के रूप में न देखें, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में अपनाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति, मजबूत बुनियादी ढांचा और बढ़ती कनेक्टिविटी इसे ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक हब बनने की क्षमता प्रदान करती है।
अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक विकास की दिशा तय करेगा और भारत इस बदलाव के केंद्र में होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, सहयोग और गहन साझेदारी के माध्यम से भारत और वैश्विक कंपनियां मिलकर एक सुरक्षित, सतत और समावेशी ऊर्जा भविष्य का निर्माण कर सकती हैं।


