पर्युषण पर्व 2025 कब है? जानें जैन धर्म के इस महत्वपूर्ण आठ दिवसीय त्योहार का महत्व, नियम और श्वेतांबर-दिगंबर संप्रदाय में इसके अंतर के बारे में पूरी जानकारी।
पर्युषण पर्व 2025 जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व इस वर्ष 21 अगस्त से शुरू होकर आठ दिन तक चलेगा। पर्युषण के दौरान जैन धर्म के अनुयायी उपवास, ध्यान और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से अपने पापों की क्षमा मांगते हैं और अहिंसा, त्याग तथा संयम के रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं।
पर्युषण पर्व का महत्व और उद्देश्य
पर्युषण का मुख्य उद्देश्य अहंकार, ईर्ष्या, विवाद से दूर रहकर आत्मा की शुद्धि करना है। इस दौरान जैन धर्म के भक्त अपनी गलतियों का आत्म-विश्लेषण करते हैं और मोक्ष की प्राप्ति के लिए तपस्या करते हैं। यह पर्व जैन धर्म में महावीर स्वामी की शिक्षाओं का पालन करते हुए जीवन को पवित्र बनाने का समय है।
श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदाय में पर्युषण पर्व का अंतर
जैन धर्म के दो प्रमुख संप्रदाय श्वेतांबर और दिगंबर अलग-अलग समय पर पर्युषण पर्व मनाते हैं। श्वेतांबर संप्रदाय 21 अगस्त से 28 अगस्त तक ‘अष्टान्हिका’ यानी आठ दिन तक पर्व मनाता है, जबकि दिगंबर संप्रदाय 28 अगस्त से 6 सितंबर तक ‘दसलक्षण’ नामक दस दिवसीय पर्व मनाता है।
दसलक्षण पर्व के 10 धर्म
दिगंबर जैन धर्म में पर्युषण पर्व के दौरान दस उत्तम गुणों का पालन किया जाता है, जिन्हें ‘दसलक्षण’ कहा जाता है:
उत्तम क्षमा धर्म
उत्तम मार्दव धर्म
उत्तम आजर्व धर्म
उत्तम शौच धर्म
उत्तम सत्य धर्म
उत्तम संयम धर्म
उत्तम तप धर्म
उत्तम त्याग धर्म
उत्तम आकिंचन धर्म
उत्तम ब्रहचर्य धर्म
पर्युषण पर्व क्यों मनाया जाता है?
पर्युषण पर्व आत्मिक विकारों के निवारण का समय है, जब जैन अनुयायी अपने जीवन का मूल्यांकन करते हैं और उन सभी से क्षमा मांगते हैं जिन्हें उन्होंने अनजाने में कष्ट पहुंचाया हो। यह पर्व जैन धर्म में शांति, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।


