शास्त्रीय संगीत के महान साधक और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित जसराज की जयंती के अवसर पर फतेहाबाद में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उनकी प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने श्रद्धा और सम्मान के साथ नमन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी, कलाकार, बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पंडित जसराज जी के संगीत जीवन, उनकी साधना और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि पंडित जसराज जी केवल एक महान गायक ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय परंपरा के सच्चे संवाहक थे। उन्होंने अपनी स्वर-साधना के माध्यम से न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
पंडित जसराज जी का जन्म हरियाणा की धरती से जुड़ा रहा और उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए पूरी दुनिया में भारतीय संगीत की सुगंध फैलायी। उनकी गायकी में शास्त्रीय अनुशासन, भावनात्मक गहराई और आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत संगम देखने को मिलता था। विशेष रूप से मेवाती घराने को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान अविस्मरणीय माना जाता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पंडित जसराज जी ने संगीत को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि साधना और आत्मिक शुद्धि का मार्ग बताया। उनकी बंदिशें, रागों की प्रस्तुति और मंच पर उनकी गरिमामयी उपस्थिति आज भी संगीत साधकों के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने युवा पीढ़ी को गुरु-शिष्य परंपरा, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का महत्व सिखाया।
प्रतिमा अनावरण के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय गायन और वादन की प्रस्तुतियां भी दी गईं। कलाकारों ने पंडित जसराज जी को समर्पित रचनाओं के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह संगीत और श्रद्धा से सराबोर नजर आया।
वक्ताओं ने कहा कि पंडित जसराज जी की विरासत केवल उनकी रिकॉर्डिंग्स या मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके विचार, संगीत दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों में भी जीवित है। उनकी स्वर-साधना और जीवन दर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को निरंतर सशक्त करता रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में पंडित जसराज जी के योगदान को नमन करते हुए कहा कि ऐसे महान कलाकार युगों में एक बार जन्म लेते हैं। फतेहाबाद में उनकी प्रतिमा का अनावरण न केवल श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बनेगा।


