कृषि मंत्री श्री सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती को भारत की प्राचीन और समृद्ध परंपरा बताते हुए किसानों से इसे अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक है।
कृषि मंत्री ने किसानों को सुझाव दिया कि वे प्राकृतिक खेती की शुरुआत कम से कम एक एकड़ भूमि से करें, ताकि इसके लाभों को समझकर धीरे-धीरे क्षेत्रफल बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार इस दिशा में किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग प्रदान कर रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 तक एक लाख एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं और प्रोत्साहन कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान इस पद्धति से जुड़ सकें।
कृषि मंत्री श्री सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक खेती से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और उपज की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह पहल किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम है।


