नई दिल्ली। राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार समारोह में आदरणीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर देशभर से आए प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने ऊर्जा संरक्षण एवं ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में हो रही उल्लेखनीय प्रगति को साझा किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सामूहिक प्रयासों के बल पर भारत आज वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। वर्तमान में देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 505 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जो भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
समारोह में यह भी बताया गया कि भारत ने अपनी ऊर्जा संक्रमण यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए पेरिस समझौते के तहत निर्धारित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के लक्ष्य से पांच वर्ष पूर्व ही 50 प्रतिशत स्थापित विद्युत क्षमता गैर-जीवाश्म ऊर्जा संसाधनों से प्राप्त कर ली है।
वक्ताओं ने दोहराया कि भारत एनडीसी लक्ष्यों को पूर्ण करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और स्वच्छ, सतत एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर ठोस कदम उठा रहा है। यह उपलब्धियां देश के उज्ज्वल और पर्यावरण-संवेदनशील भविष्य की ओर मजबूत संकेत हैं।
आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आदरणीय राष्ट्रपति महोदया द्रौपदी मुर्मू जी की गरिमामई उपस्थिति में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार में सम्मिलित होने का सुअवसर मिला।
हम सभी के सामूहिक प्रयासों से भारत ने आज वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में खुद को अग्रणी देशों में स्थापित… pic.twitter.com/tD4vGL0iHL
— Manohar Lal (@mlkhattar) December 14, 2025


