एक्ट्रेस नरगिस फाखरी ने बताया कि उन्होंने दोनों घुटनों में मेनिस्कस टियर के इलाज के लिए बोन मैरो स्टेम सेल थेरेपी कराई है। उन्होंने कहा कि ढाई महीने में ही उन्हें 75 से 80 फीसदी तक आराम मिला है और सर्जरी से पहले इस विकल्प पर विचार करने की सलाह दी।
बॉलीवुड अभिनेत्री नरगिस फाखरी ने हाल ही में अपने फैंस के साथ घुटनों की पुरानी चोट से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्टेम सेल थेरेपी करवाई है और इसका असर बेहद सकारात्मक रहा है। एक वीडियो संदेश में अभिनेत्री ने खुलासा किया कि डांसिंग के वर्षों के कारण उनके दोनों घुटनों में मेनिस्कस टियर हो गया था, जिसके लिए उन्होंने बोन मैरो स्टेम सेल प्रोसीजर का सहारा लिया।
नरगिस फाखरी ने बताया कि इलाज के करीब ढाई महीने बाद वह खुद को काफी बेहतर महसूस कर रही हैं। उनके मुताबिक, अब उनकी हालत पहले से 75 से 80 प्रतिशत तक सुधर चुकी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही परेशानी के मुकाबले यह बदलाव काफी बड़ा और राहत देने वाला है।
अभिनेत्री ने यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं था जब उन्हें इस तरह की घुटनों की समस्या का सामना करना पड़ा। करीब दस साल पहले भी उन्हें दोनों घुटनों में मेनिस्कस टियर की शिकायत हुई थी, लेकिन उस समय उन्होंने सर्जरी कराने से इनकार कर दिया था। तब उन्होंने फिजियोथेरेपी और मसल स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के जरिए खुद को संभालने की कोशिश की, जिसमें काफी समय लगा और रिकवरी में सालों लग गए।
इस बार इलाज के लिए उन्होंने स्टेम सेल थेरेपी को चुना। उन्होंने बताया कि अब यह तकनीक ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध है, इसलिए उन्होंने विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेकर यह फैसला किया। उनके अनुसार, इस बार रिकवरी की रफ्तार पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज रही और कुछ ही महीनों में उन्हें अच्छा फर्क महसूस होने लगा।
नरगिस फाखरी ने घुटनों की समस्या से जूझ रहे लोगों को सलाह दी कि सर्जरी कराने से पहले इस तरह के विकल्पों पर जरूर विचार करें। उनका कहना है कि हर किसी की स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन अगर कोई कम इनवेसिव और असरदार तरीका मौजूद है, तो उसे आजमाया जाना चाहिए।
मेनिस्कस टियर घुटनों की आम चोटों में से एक माना जाता है, खासकर उन लोगों में जो डांसिंग, स्पोर्ट्स या ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी में रहते हैं। आम तौर पर शुरुआती इलाज में फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है, जबकि गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। हाल के वर्षों में स्टेम सेल थेरेपी को एक वैकल्पिक और रीजेनेरेटिव ट्रीटमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि इसकी लंबी अवधि की प्रभावशीलता पर अभी भी शोध जारी है।


