दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के विद्यालयों में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर सही अवसर और मंच मिले, तो प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित तीसरी दिल्ली राज्य पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में निगम के 200 दिव्यांग छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले ही दिन कुल 124 पदक अपने नाम कर लिए। यह उपलब्धि न सिर्फ छात्रों की मेहनत का नतीजा है, बल्कि निगम की समावेशी शिक्षा नीति की सफलता को भी दर्शाती है।
यह प्रतियोगिता 5 से 7 फरवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें दिल्ली भर से विभिन्न संस्थानों और स्कूलों के दिव्यांग खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। उद्घाटन समारोह के दौरान दिल्ली नगर निगम के विद्यालयों के छात्रों ने मार्च पास्ट में हिस्सा लेकर आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। छात्रों का जोश, अनुशासन और आत्मविश्वास देखकर दर्शक और आयोजक दोनों ही काफी प्रभावित नजर आए।
दिल्ली नगर निगम के इन छात्रों को अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट विकास डागर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण दिया गया था। अनुभवी कोच की देखरेख में मिली इस विशेष ट्रेनिंग का असर मैदान पर साफ दिखाई दिया। छात्रों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी-अपनी स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और बेहतरीन प्रदर्शन कर कई पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
इस प्रतियोगिता में निगम के दिव्यांग छात्रों ने दृष्टिबाधित, बौद्धिक अक्षमता, मस्तिष्क पक्षाघात, ड्वार्फ और लोकोमोटर (हाथ एवं पैर) जैसी विभिन्न श्रेणियों में भाग लिया। इन सभी वर्गों के खिलाड़ियों ने न सिर्फ भागीदारी निभाई, बल्कि अपने खेल कौशल से यह साबित किया कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
प्रतियोगिता के दौरान छात्रों ने 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, गोला फेंक और चक्का फेंक जैसी कई एथलेटिक स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। हर इवेंट में खिलाड़ियों ने खेल भावना के साथ प्रदर्शन किया और दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। पहले ही दिन 124 पदक जीतना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसने दिल्ली नगर निगम के स्कूलों की खेल और प्रशिक्षण व्यवस्था को नई पहचान दी है।
निगम अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली नगर निगम अपने स्कूलों में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि हर छात्र को समान अवसर मिल सके। लक्ष्य यही है कि विद्यार्थी सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेल और अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ें और अपने हुनर का लोहा मनवाएं।
दिल्ली नगर निगम के इन दिव्यांग छात्रों का यह प्रदर्शन आने वाले समय में दूसरे छात्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही संसाधन, बेहतर प्रशिक्षण और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।


