पावन पर्व मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर देशभर में आस्था, उल्लास और नव संकल्पों का वातावरण देखने को मिला। यह पर्व सूर्यदेव की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक है, जिसे भारतीय संस्कृति में शुभता, ऊर्जा और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत माना जाता है। मकर संक्रांति न केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व है, बल्कि यह मानव जीवन में नई दिशा, नई सोच और नए संकल्पों को अपनाने का संदेश भी देता है।
इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों ने सूर्यदेव की उपासना कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मान्यता है कि उत्तरायण काल में किए गए शुभ कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को दान, सेवा और परोपकार से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और तिल-गुड़ का दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
मकर संक्रांति के संदेश में यह भावना स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है कि सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प से समाज और राष्ट्र की प्रगति संभव है। सूर्यदेव की उत्तरायण यात्रा हमें यह प्रेरणा देती है कि जैसे सूर्य अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाता है, वैसे ही हमें भी अपने विचारों और कर्मों से समाज में सकारात्मकता और आशा का संचार करना चाहिए। यह पर्व हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि हम अपने व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्वों को ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएं।
इस पावन अवसर पर एकता, सेवा और समर्पण के भाव को अपनाने का संकल्प लेने की अपील की गई। सामाजिक सौहार्द, भाईचारा और सहयोग की भावना ही किसी भी राष्ट्र की असली ताकत होती है। मकर संक्रांति हमें याद दिलाती है कि जब समाज के सभी वर्ग मिलकर कार्य करते हैं, तभी विकास की राह सशक्त होती है। किसानों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह नई फसल और परिश्रम के फल का प्रतीक है।
देश के विभिन्न हिस्सों में मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं यह पोंगल के रूप में मनाई जाती है, तो कहीं उत्तरायण और खिचड़ी पर्व के नाम से। विविधताओं के बावजूद इसका मूल संदेश एक ही है—जीवन में संतुलन, सामंजस्य और निरंतर प्रगति।
अंत में, मकर संक्रांति का पर्व सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य लेकर आए, यही कामना की गई। यह अवसर हमें प्रेरित करता है कि हम व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्रहित के लिए कार्य करें। नए संकल्प, सकारात्मक दृष्टिकोण और जनकल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ना ही इस पर्व का वास्तविक सार है।
मकर संक्रांति की यह शुभ बेला सभी के जीवन में सुख, स्वास्थ्य और सफलता लेकर आए। आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ।


