खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने देशभर में 139 नए खेलो इंडिया केंद्रों को मंजूरी दी है। इसके तहत महेंद्रगढ़ जिले में 15 खेल केंद्र खुलेंगे, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण मिलेगा।
प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने और भविष्य के ओलंपिक चैंपियन तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने देशभर में 139 अतिरिक्त खेलो इंडिया केंद्रों को मंजूरी दे दी है। इसी योजना के तहत महेंद्रगढ़ जिले में 15 नए खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को अपने ही जिले में बेहतर प्रशिक्षण का मौका मिलेगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इन केंद्रों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें वैज्ञानिक व आधुनिक तरीके से प्रशिक्षित करना है। महेंद्रगढ़ में बनने वाले ये केंद्र विभिन्न खेलों को कवर करेंगे, ताकि अलग-अलग खेलों में रुचि रखने वाले युवाओं को समान अवसर मिल सके।
इन केंद्रों की स्थापना के लिए उन्हीं संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास पर्याप्त खेल मैदान, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है या जिन्हें जल्दी विकसित किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खिलाड़ियों को शुरुआत से ही बेहतर माहौल और संसाधन मिलें।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के खिलाड़ियों को फायदा होगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत प्रतिभा पूल तैयार किया जा सकेगा। महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में इस तरह के केंद्र खुलने से स्थानीय युवाओं को बड़े शहरों की ओर पलायन किए बिना ही प्रोफेशनल ट्रेनिंग मिल सकेगी।
खेलो इंडिया योजना के तहत पहले से ही देश के कई हिस्सों में प्रशिक्षण केंद्र काम कर रहे हैं, जहां से कई उभरते खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। अब 139 नए केंद्रों की मंजूरी के साथ इस नेटवर्क का और विस्तार होगा, जिससे खेल प्रतिभाओं को खोजने और तराशने की प्रक्रिया और तेज हो जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इन केंद्रों के जरिए स्कूल और कॉलेज स्तर के खिलाड़ियों को भी विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि वे आगे चलकर राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें। महेंद्रगढ़ में बनने वाले 15 केंद्रों से जिले की खेल गतिविधियों में नई जान आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, साई की यह पहल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में खेलों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


