महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयागराज की त्रिवेणी संगम में साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। भक्तों ने भगवान शिव और माँ गंगा से सुख-शांति और कल्याण की कामना की।
देवाधिदेव महादेव की उपासना को समर्पित महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयागराज की त्रिवेणी संगम पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस शुभ दिन पर देश-विदेश से आए साधु-संतों, धर्माचार्यों, कल्पवास के लिए आए साधकों और हजारों श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शिव व माँ गंगा की आराधना की।
सुबह से ही संगम तट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर ओर “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे और वातावरण पूरी तरह भक्ति-मय हो गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से स्नान कर पूजा-अर्चना की और अपने परिवार, समाज और देश के लिए सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
धर्माचार्यों और संत-महात्माओं ने महाशिवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व आत्मशुद्धि, साधना और शिव-भक्ति का विशेष अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माँ गंगा की कृपा से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कल्पवास के लिए आए साधकों ने भी संगम तट पर विशेष पूजा और साधना की। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि का स्नान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत माना जाता है।
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि सभी लोग सुचारू रूप से स्नान और दर्शन कर सकें। पूरे दिन संगम क्षेत्र में अनुशासन और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
भक्तों ने प्रार्थना की कि देवाधिदेव महादेव और पुण्य प्रदायिनी माँ गंगा की कृपा सभी पर बनी रहे, साधकों की साधना सफल हो और श्रद्धालुओं के मनोरथ पूर्ण हों। इस प्रकार महाशिवरात्रि का यह पावन स्नान पर्व आस्था, विश्वास और भक्ति के संगम के रूप में यादगार बन गया।


