हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। माघ पूर्णिमा को ‘बत्तीस पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन स्नान, दान, जप और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन से कष्टों को दूर कर सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं।
माघ पूर्णिमा 2026 की तिथि और पंचांग विवरण
वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी से प्रारंभ होकर 2 फरवरी तक रहेगी। पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा का व्रत 1 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रमा का उदय संध्या 05:26 बजे होगा। पूर्णिमा तिथि में किए गए धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं।
स्नान-दान का शुभ समय
माघ पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से सुबह 05:24 बजे से 06:17 बजे तक का समय स्नान और दान के लिए श्रेष्ठ है। हालांकि, शास्त्रों में पूरे दिन दान-पुण्य को स्वीकार्य बताया गया है। श्रद्धालु नदी, सरोवर या घर पर ही स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
माघ पूर्णिमा पर पूजा विधि
इस दिन भगवान विष्णु और सत्यनारायण भगवान की पूजा का विशेष महत्व है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। पंचामृत से अभिषेक कर पंजीरी या मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
माघ पूर्णिमा पर दान का महत्व
शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा पर किया गया दान अक्षय फल देता है। इस दिन तिल, गुड़, वस्त्र, कंबल, अन्न, घी, फल, लड्डू और जरूरतमंदों को भोजन कराना विशेष पुण्यदायी माना गया है। ‘मत्स्य पुराण’ में उल्लेख है कि माघ पूर्णिमा पर किए गए दान से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे स्वर्ग एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
माघ पूर्णिमा स्नान का धार्मिक महत्व
माघ मास में तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। पौष पूर्णिमा से लेकर माघ पूर्णिमा तक किए गए स्नान को अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए स्नान से सूर्य और चंद्र ग्रहों के दोष शांत होते हैं। विशेष रूप से प्रयागराज संगम में स्नान करने से अनेक जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। स्नान के समय गायत्री मंत्र या विष्णु मंत्र का जाप करना शुभ फल प्रदान करता है।
आध्यात्मिक संदेश
माघ पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, दया और परोपकार की भावना को जागृत करने का पर्व भी है। इस दिन का व्रत और दान व्यक्ति को आत्मिक शांति, सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।


