पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि एक्साइज पॉलिसी मामले में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को राहत मिलना न्यायिक जांच में आरोपों के टिक न पाने का प्रमाण है।
पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष Kultar Singh Sandhwan ने एक्साइज पॉलिसी मामले में अदालत द्वारा Arvind Kejriwal, Manish Sisodia समेत 23 आरोपियों को राहत दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे संवैधानिक नैतिकता और कानून के शासन की पुनर्पुष्टि बताया।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक मंचों पर लगाए गए आरोप न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं पाए।
⚖️ ‘प्रथम दृष्टया मामला सिद्ध नहीं’
संधवां ने कहा कि जब किसी निर्वाचित मुख्यमंत्री का नाम बिना ठोस साक्ष्य के उछाला जाता है और जांच एजेंसियां प्रथम दृष्टया मामला भी स्थापित नहीं कर पातीं, तो यह संस्थागत प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
उन्होंने अदालत द्वारा जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश को जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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🗳️ ‘लोकतंत्र में सत्य की जीत’
स्पीकर ने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में अंततः सत्य और न्याय की ही जीत होती है।
संधवां के अनुसार, यह निर्णय न केवल संबंधित नेताओं की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की बहाली है, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
📌 निष्कर्ष
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह फैसला दर्शाता है कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका सर्वोपरि है और संवैधानिक ढांचे के तहत ही सभी संस्थाओं को जवाबदेह रहना चाहिए।

