नीलकंठेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश में स्थित एक प्रमुख शिव मंदिर, जहां प्रतिदिन शिवलिंग पर फूल चढ़ने की रहस्यमयी मान्यता है। जानें इस मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, मान्यताएं और खास महत्व।
नीलकंठेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है, जो हिंदू धर्म में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख स्थल माना जाता है। इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लिए आते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। खासतौर पर सावन माह में इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक होती है, क्योंकि इस समय भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है।
मान्यता और रहस्य:
नीलकंठेश्वर मंदिर से जुड़ी एक दिलचस्प मान्यता यह है कि मंदिर के पट खुलते ही शिवलिंग पर फूल चढ़ा हुआ मिलता है। यह घटना आज तक एक रहस्य बनी हुई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बुंदेलखंड के प्रसिद्ध सेनापति आल्हा और ऊदल, जो महाकाल के भक्त थे, रात को यहां फूल चढ़ाने आते थे। उनके इस आस्था से जुड़ी मान्यता के कारण, मंदिर के पट खुलने पर शिवलिंग पर हमेशा फूल मिलता है।
इसके अलावा, इस मंदिर से जुड़ी एक और दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर को एक व्यक्ति ने रातों-रात बना दिया था। हालांकि, इस मंदिर की दीवारों पर भगवान की प्रतिमाएं खंडित पाई जाती हैं, जो यह संकेत देती हैं कि इन प्रतिमाओं को मुगलों द्वारा आक्रमण के दौरान क्षतिग्रस्त किया गया था। यह ऐतिहासिक स्थल उस समय की घटनाओं और संघर्षों का गवाह भी है।
सावन माह में नीलकंठेश्वर मंदिर की विशेष पूजा:
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। शास्त्रों में भी उल्लेख है कि इस महीने में केवल जल से महादेव का जलाभिषेक करने से व्यक्ति के जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं। साथ ही यह माह भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का भी प्रतीक है, जिससे इस दौरान शिव की पूजा करने से हर तरह की बाधाएं दूर होती हैं। नीलकंठेश्वर मंदिर में सावन के दौरान विशेष पूजा और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और भक्ति को प्रकट करते हैं।
नीलकंठेश्वर मंदिर की विशेष पूजा विधि:
नीलकंठेश्वर मंदिर में सुबह के समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल चढ़ाए जाते हैं। मंदिर के आसपास के वातावरण में विशिष्ट शांति और ठंडक महसूस होती है, जो श्रद्धालुओं को भगवान शिव के साथ जोड़ देती है। सावन माह में यहां भक्तों द्वारा जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस समय महादेव की पूजा से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।


