भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के पैतृक गांव पेटवाड़, हांसी में उनके सम्मान में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां ग्रामीणों ने अपने गौरव को सम्मानित करने के लिए पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ सहभागिता की। समारोह में गांववासियों, बुजुर्गों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और विभिन्न वर्गों के लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने गांव और यहां के लोगों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनका जीवन और व्यक्तित्व गांव के संस्कारों, बुजुर्गों के आशीर्वाद, माता-पिता के मार्गदर्शन और शिक्षकों की प्रेरणा का परिणाम है। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि गांव का स्नेह और बुजुर्गों का आशीर्वाद उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसने उन्हें हर चुनौती में आगे बढ़ने की शक्ति दी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े व्यक्ति के भीतर जो संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है, वही उसे जीवन में सही दिशा दिखाता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाने का आह्वान किया और कहा कि कठिन परिश्रम, ईमानदारी और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि बड़े सपने देखने से न डरें और अपने गांव, प्रदेश व देश का नाम रोशन करें।
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को मॉडल संस्कृति स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे गांव के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। इस घोषणा का ग्रामीणों ने तालियों के साथ स्वागत किया और इसे गांव के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में पेटवाड़ गांव में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं का भी व्यापक विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था के साथ बेहतर स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा किसी भी गांव की प्रगति की नींव होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से ही देश का समग्र विकास संभव है।
समारोह के दौरान गांव के बुजुर्गों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत का स्वागत करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, मेहनत और सफलता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि गांव का एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिनमें हरियाणा की लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। अंत में गांववासियों ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनके दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
कुल मिलाकर, पेटवाड़ गांव में आयोजित यह सम्मान समारोह केवल एक व्यक्ति के सम्मान का अवसर नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण प्रतिभा, शिक्षा के महत्व और सामाजिक मूल्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की घोषणाओं और प्रेरक संदेश से गांववासियों में विकास और उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीद जगी है।


