अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव हमारी प्राचीन भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत के पुनर्जागरण का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर माँ सरस्वती का वंदन करते हुए इस ऐतिहासिक महोत्सव के समापन समारोह में सहभागिता करना सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं के लिए गौरव का विषय रहा। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित सरस्वती महोत्सव के सामूहिक समापन समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरस्वती केवल एक पौराणिक नदी नहीं, बल्कि भारत की महान संस्कृति, ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का एक सशक्त सांस्कृतिक सूत्र है।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरस्वती नदी भारतीय सभ्यता की जीवनरेखा रही है। वैदिक काल से लेकर आज तक सरस्वती का उल्लेख हमारे ग्रंथों, साहित्य और संस्कृति में मिलता है। यह नदी केवल भौगोलिक अस्तित्व नहीं, बल्कि ज्ञान, साधना और संस्कार की धारा का प्रतीक है। अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव के माध्यम से इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में बताया गया कि सरस्वती नदी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की स्थापना की गई थी। गहन शोध, वैज्ञानिक अध्ययन और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। हरियाणा में सरस्वती नदी को पुनः प्रवाहित करने की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है, जिससे इस प्राचीन नदी की पहचान को पुनः जीवंत किया जा सके।
वक्ताओं ने जानकारी दी कि सरस्वती नदी के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ एक ऐतिहासिक समझौता भी किया है। इस समझौते के तहत जल संरक्षण, प्रवाह प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि सरस्वती नदी का सतत और स्थायी प्रवाह सुनिश्चित हो सके।
समारोह में यह भी कहा गया कि सरस्वती हेरिटेज प्रोजेक्ट केवल अतीत की खोज नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए स्थिर और संतुलित विकास का एक मिशन है। इस परियोजना के अंतर्गत सरस्वती से जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों को ‘सरस्वती तीर्थ’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे।
समापन समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, वैदिक मंत्रोच्चारण और आध्यात्मिक कार्यक्रमों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। देश-विदेश से आए विद्वानों, शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने सरस्वती सभ्यता पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि सरस्वती नदी और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का यह समापन समारोह भारतीय संस्कृति की निरंतरता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का संदेश देकर सभी के लिए स्मरणीय बन गया।


