हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने वाला अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव इस वर्ष 19 से 25 जनवरी तक भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है। यह महोत्सव श्रद्धा, संस्कृति और इतिहास का ऐसा संगम है, जो देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को एक सूत्र में बांधता है। महोत्सव का गौरवमयी शुभारंभ 19 जनवरी को आदिबद्री से हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा किया जाएगा।
सरस्वती नदी भारतीय सभ्यता की प्राचीनतम धाराओं में से एक मानी जाती है। अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का उद्देश्य इसी गौरवशाली विरासत को जनमानस तक पहुंचाना, सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करना और भावी पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़ना है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को प्रोत्साहित करता है, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन और लोक कलाओं के संरक्षण को भी नई दिशा देता है।
महोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। देश के विभिन्न राज्यों के कलाकार अपनी लोक कला, लोक संगीत और नृत्य प्रस्तुत करेंगे, वहीं अंतरराष्ट्रीय कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक झलकियों से महोत्सव को वैश्विक रंग प्रदान करेंगे। सरस्वती नदी के महत्व, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और संरक्षण से जुड़े विषयों पर संगोष्ठियां, विचार गोष्ठियां और प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएंगी।
महोत्सव को विशेष पहचान दिलाने के लिए इस दौरान सरस मेला भी आयोजित किया जाएगा। सरस मेले में स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और हस्तशिल्प कलाकारों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जाएगी। यहां पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, ग्रामीण उत्पाद और स्थानीय व्यंजन उपलब्ध होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होगा।
आदिबद्री, जिसे सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना जाता है, इस महोत्सव का प्रमुख केंद्र होगा। यहां धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु सरस्वती नदी की पवित्रता और भारतीय सभ्यता में उसके योगदान को निकट से अनुभव कर सकेंगे। महोत्सव के दौरान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण जैसे संदेशों को भी विशेष रूप से प्रसारित किया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव हरियाणा को सांस्कृतिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी सृजित होंगे।
अंत में आयोजकों ने प्रदेशवासियों और देश-विदेश के पर्यटकों से आह्वान किया है कि वे इस पावन अवसर का हिस्सा बनें और श्रद्धा व संस्कृति के इस महाआयोजन में सहभागिता कर भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का साक्षी बनें। अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव निस्संदेह आस्था, कला और संस्कृति का एक अनुपम उत्सव साबित होगा।


