माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इसी क्रम में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। उत्तर प्रदेश के एटा जिले स्थित Patna Bird Sanctuary और गुजरात के कच्छ क्षेत्र का Chhari-Dhand अब अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्र क्षेत्रों की Ramsar Convention सूची में शामिल कर लिए गए हैं। यह उपलब्धि भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर और अधिक मजबूत करती है।
रामसर साइट का दर्जा मिलना किसी भी आर्द्र क्षेत्र के लिए गौरव की बात होती है। इसका अर्थ है कि यह क्षेत्र न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता, पारिस्थितिकी संतुलन और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। एटा का पटना पक्षी अभयारण्य विभिन्न प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है, जबकि गुजरात का छरी-ढांड क्षेत्र कच्छ के शुष्क परिदृश्य में एक अनमोल प्राकृतिक धरोहर के रूप में जाना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों आर्द्र क्षेत्रों का रामसर सूची में शामिल होना यह दर्शाता है कि भारत में पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। यह वह यात्रा है, जिसमें विकास और पर्यावरण साथ-साथ चलते हैं और एक-दूसरे के पूरक बनते हैं।
केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई पर्यावरण-अनुकूल नीतियों, आर्द्र क्षेत्रों के संरक्षण के लिए बनाए गए विशेष कार्यक्रमों और राज्यों के सहयोग से यह सफलता संभव हो पाई है। इससे न केवल जैव विविधता की रक्षा होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे, जैसे कि ईको-टूरिज्म और सतत पर्यटन।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत सतत विकास, पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जलवायु परिवर्तन के दौर में आर्द्र क्षेत्रों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि ये क्षेत्र बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के एटा जिले और गुजरात के कच्छ क्षेत्र के नागरिकों, प्रशासन तथा उन सभी हितधारकों को बधाई दी जा रही है, जिन्होंने वर्षों से इन आर्द्र क्षेत्रों के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित प्रयास किए हैं। यह सफलता न केवल इन क्षेत्रों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत भी है कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाकर कैसे आगे बढ़ा जा सकता है।
रामसर सूची में यह नया जुड़ाव भारत की वैश्विक छवि को और सशक्त करता है और आने वाले समय में पर्यावरणीय नेतृत्व के रूप में देश की भूमिका को और मजबूत करेगा।

