बिल्व पत्र का महत्व: सावन 2025 में शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने से मिलती है शिव कृपा और पापों से मुक्ति। जानिए बेल पत्र का आध्यात्मिक महत्व, शास्त्रों में वर्णित लाभ और सही पूजा विधि।
बिल्व पत्र का महत्व: सावन के पावन महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। खासतौर पर बिल्व पत्र (बेल पत्र) को शिवलिंग पर अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में यह स्पष्ट कहा गया है कि बिल्व पत्र का दर्शन, स्पर्श और भगवान शिव को अर्पण करना भी पापों के नाश का मार्ग खोल देता है।
बिल्व पत्र का धार्मिक महत्व क्या है?
बिल्व पत्र को भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्र कहा गया है। इसमें त्रिदेवों – ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। इसके तीन दल क्रमश: सृष्टि, पालन और संहार का प्रतीक हैं। यही कारण है कि जब भक्त शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाते हैं, तो वे त्रिमूर्ति की आराधना करते हैं।
शिव पुराण में क्या है बिल्व पत्र का उल्लेख? (बिल्व पत्र का महत्व)
शिव पुराण में एक श्लोक में कहा गया है:
“बिल्वपत्रस्य दर्शनं, स्पर्शनं पापनाशनम्।
अघोर पाप संहारं, बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।।”
इसका अर्थ है कि बिल्व पत्र का केवल दर्शन और स्पर्श भी घोर पापों को नष्ट कर सकता है, और यदि इसे श्रद्धा से शिव को अर्पित किया जाए, तो अत्यंत पुण्य प्राप्त होता है।
शिव की उग्रता को शांत करता है बिल्व पत्र
बिल्व पत्र में एक विशेष गुण इसकी शीतलता है, जो भगवान शिव के तप्त शरीर को ठंडक और शांति प्रदान करता है। यही कारण है कि श्रावण मास में बिल्व पत्र अर्पण का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
बेल वृक्ष का स्पर्श और दर्शन भी पुण्यदायक
मान्यता है कि जो भक्त बेल वृक्ष के नीचे स्थित शिवलिंग की पूजा करता है या बेल वृक्ष के नीचे बैठकर शिव का ध्यान करता है, उसे तीर्थ स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। बेल वृक्ष को शिवतत्त्व से युक्त माना गया है।
बिल्व पत्र का विकल्प और पूजन नियम
यदि वनस्पति से प्राप्त बिल्व पत्र उपलब्ध न हो, तो आप सोना, चांदी या तांबे से निर्मित बिल्व पत्र शिव को अर्पित कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इसका पूजन भी उतना ही फलदायी होता है। यदि आपने किसी विशेष संख्या में बिल्व पत्र चढ़ाने का संकल्प लिया है, तो उसे पूर्ण निष्ठा से निभाना चाहिए। रोज़ की संख्या में कटौती नहीं करनी चाहिए।
बिल्व पत्र से जुड़ा विशेष पुण्य
पुराणों में कहा गया है कि यदि कोई श्रद्धालु एक आक का फूल, एक कनेर का फूल और एक बिल्व पत्र एक साथ शिवलिंग पर अर्पित करता है, तो उसे दस स्वर्ण मुद्राएं दान करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।


